रीवा में कांग्रेस का क्यों हो रहा बंटाधार

भोपाल/रीवा। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर लिस्ट जारी करने के बाद कांग्रेस को चौतरफा विरोध का सामना करना पड़ रहा है। राजधानी से लेकर पूरे प्रदेश में नाराज दावेदार अब कांग्रेस के खिलाफ लामबंद हो गए हैं और निर्दलीय प्रत्याशी उतारने की रणनीति बना रहे हैं। रीवा में भी ऐसी ही तस्वीर देखने को मिल रही है। जिले की देवतालाब विधानसभा पर पैराशूट उम्मीदवार उतारने से स्थानीय नेता पार्टी के फैसले के खफा हैं और संयुक्त रूप से निर्दलीय उम्मीदवार उतारने की मंशा बना रहे हैं। 

जानकारी के मुताबिक रीवा जिले की देवतालाब विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस ने विद्यावती पटेल को टिकट दिया है। देवतालाब एक ऐसी सीट है जिसे कांग्रेस पिछले 25 वर्षों में नही जीत पाई है। इस सीट पर वर्तमान में विधायक भाजपा के गिरीश गौतम हैं। लेकिन दूसरे नंबर इस सीट पर बीएसपी आती रही है। पिछले चुनाव में बसपा दूसरे नंबर पर रही है और कांग्रेस उससे भी कमजोर रही, इसलिए इस बार कांग्रेस ने बीएसपी नेता को ही अपना उम्मीदवार बनाकर उतार दिया। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के पुराने नेताओं द्वारा पार्टी द्वारा पैराशूट उम्मीदवारों को हटाने का पुरजोर विरोध किया जा किया गया है और सहमति बनी कि कांग्रेस आलाकमान द्वारा लिए गए निर्णय का विरोध किया जाएगा। बैठक में कहा गया कि विधानसभा क्षेत्र में समर्पित कांग्रेस नेताओं का कार्यकर्ताओं का अपमान है तो बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नेताओं द्वारा पार्टी के नेताओं को सबक सिखाने के लिए सर्वसम्मति से एक प्रत्याशी निर्दलीय मैदान में उतारा जाएगा। इसमें एसएस तिवारी का नाम पर सबकी सहमति बन गई है। हालांकि कुछ और दावेदारों के नाम पर चर्चा की जा रही है।

कौन हैं विद्यावती पटेल

देवतालाब में विद्यावती पटेल एक ऐसे नेता के रूप में विद्यमान है जिनकी राजनैतिक बिसात ही सवर्ण विरोधी है। बहुजन समाज पार्टी के नेता के रूप में खुले मंचों से सवर्ण विरोधी भाषण देना विद्यावती की पहचान है। विद्यावती की स्वर्ण विरोधी मानसिकता उनके विधायक बनने के बाद चरम पर हो गई और 2009 के चुनावों में विद्यावती देवतालाब में किसी भी सवर्ण के घर वोट मांगने नहीं गईं। सवर्ण विरोधी मानसिकता का खामियाजा उन्हें अपने निर्वाचन से चुकाना पड़ा और जनता ने उन्हें 2013 में भी नकार दिया। देखना यह है कि विद्यावती पटेल जी देवतालाब के 84000 ब्राह्मण , 14000 राजपूत 8000 वैश्य एवम 2000 कायस्थ वोटरों के साथ किये गए 15 साल के अंतहीन सवर्ण विरोधी राजनीति की बिसात कैसे फिट करती है ।