Bhind News: रेत को लेकर फिर रक्त रंजित चंबल, व्यापारी की गोली मारकर हत्या

दरअसल भिंड में सिंध नदी पर उत्खनन की अनुमति है लेकिन उसके बावजूद वहां पर व्यापक पैमाने पर वैध अनुमति से ज्यादा अवैध उत्खनन किया जाता है। इसके साथ ही साथ चंबल नदी पर रेत उत्खनन की पूरी तरह से पाबंदी है।

भिंड, गणेश भारद्वाज। रेत उत्खनन (Sand quarrying) कंपनी पावरमेक (Powermake) के कारिंदों और उसके भाड़े के गुंडों ने रेत व्यापारी की हत्या की है। व्यापारी की बंदूक से गोली मारकर हत्या की गई है। मेहगांव निवासी रोकी गुर्जर की सीने में गोली लगने से घटना स्थल पर ही मौत हो गई। जबकि एक अन्य युवक गोली लगने से समरथ तोमर घायल।

इधर पुलिस ने तीन भाड़े के गुंडों व एक कम्पनी कर्मचारी सहित 7 अज्ञात पर हत्या का मामला दर्ज (FIR) किया है। विनोद मद्रासी पावरमेक, बलदेव राजपूत मेहरा, प्रदीप गुर्जर डांग छेंकुरी, शैलेंद्र राजपूत अमायन पर हत्या का मामला दर्ज किया है। अमायन थाना क्षेत्र के गहेली नाके की घटना है।

यह पहला मौका नहीं है जब रेत माफियाओं का आतंक चंबल अंचल में दिखा हो। भिंड के तत्कालीन एसपी (SP) को तो इसलिए हटा दिया गया था कि उनके ऊपर रेत माफियाओं को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगे थे। दरअसल भिंड में सिंध नदी पर उत्खनन की अनुमति है लेकिन उसके बावजूद वहां पर व्यापक पैमाने पर वैध अनुमति से ज्यादा अवैध उत्खनन किया जाता है। इसके साथ ही साथ चंबल नदी पर रेत उत्खनन की पूरी तरह से पाबंदी है।

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बावजूद उसके रोजाना सैकड़ों ट्रक रेत चंबल से भी निकाली जाती है। इस खेल में क्या पुलिस, क्या प्रशासन, क्या खनिज अधिकारी, क्या राजनेता, सब के सब शामिल है। तत्कालीन सामान्य प्रशासन मंत्री डॉक्टर गोविंद सिंह तो रेत उत्खनन रोकने में अपनी विफलता के लिए माफी तक माग चुके है।

गुरुवार को ही रेत के अवैध उत्खनन को लेकर भिंड के विधायक संजीव सिंह कुशवाह ने विधानसभा में प्रशासन पर इसे ना रोक पाने के गंभीर आरोप लगाए थे। उसके बाद सदन में पूरे प्रदेश में रेत के अवैध उत्खनन को लेकर व्यापक रूप से हंगामा हुआ था। सरकार ने दावा किया था कि अवैध उत्खनन पर पूरी तरह से नियंत्रण लगाने के लिए कटिबद्ध है।

इतना ही नहीं, मुरैना जिले में चंबल नदी से अवैध रेत उत्खनन को लेकर राजस्थान के धौलपुर जिले के एसपी मुरैना के आईजी और एसपी को पत्र तक लिख चुके हैं कि मुरैना से आने वाली अवैध रेत के चलते धौलपुर में यातायात पर विपरीत असर पड़ रहा है। बावजूद रेत का कारोबार लगातार जारी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शिवराज सरकार रेत माफियाओं के खिलाफ व्यापक अभियान चला रही है ,ग्वालियर चंबल अंचल में रेत का खूनी खेल कब रूकेगा।