रेमेडीसिवीर की कालाबाजारी: क्राइम ब्रांच के दो सब इंस्पेक्टर सस्पेंड, एक संदिग्ध की जाँच जारी

मामले में SP मुख्यालय द्वारा जांच के आदेश दिए गए थे। जहां जांच में सब इंस्पेक्टर एमडी अहिरवार और सब इंस्पेक्टर हरिकिशन वर्मा को आरोपी पाया गया है।

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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। देश सहित प्रदेश भर में जहां एक तरफ कोरोना (corona) का कहर जारी है। वहीं दूसरी तरफ लगातार जीवन रक्षक दवाइयों की कालाबाजारी (Black marketing) थमने का नाम नहीं ले रही है। इसी बीच रेमेडीसिवीर इंजेक्शन (Remedisivir Injection) की कालाबाजारी मामले में क्राइम ब्रांच (crime branch) के दो सब इंस्पेक्टर (sub inspector) को लेन-देन के आरोप में सस्पेंड (suspend) कर दिया गया है। वही मामले में एक और सब इंस्पेक्टर की भूमिका की जांच की जा रही है।

दरअसल राजधानी भोपाल के कोलार पुलिस के हाथ जीवन रक्षक रेमेडीसिवीर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वाले तीन आरोपी पुलिस के हाथ लगे थे। जिनमें एक आरोपी को हिरासत में लेने के बाद लेनदेन कर उसे छोड़ देने का आरोप लगाया गया। इस मामले में SP मुख्यालय द्वारा जांच के आदेश दिए गए थे। जहां जांच में क्राइम ब्रांच के सब इंस्पेक्टर एमडी अहिरवार और सब इंस्पेक्टर हरिकिशन वर्मा को आरोपी पाया गया है।

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दोनों सब इंस्पेक्टर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस मामले में एक और सब इंस्पेक्टर की भूमिका की जांच की जा रही है। हालांकि जांच अभी जारी है। इधर एसपी मुख्यालय की माने तो पुलिसकर्मियों ने आरोपी को छोड़ने के लिए कितने में सौदा पक्का किया है। इस बात की भी जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि पुलिस द्वारा तीनों सब इंस्पेक्टर को दोबारा रिमांड पर लेकर पूछताछ किया जाएगा। वही मामले में कई अन्य तरह के खुलासे संभव है।

बता दें कि कोरोना से जंग में रेमेडीसिवीर इंजेक्शन को जीवन रक्षक के तौर पर देखा जा रहा है। जिसके बाद इसकी मांग और खपत में भी तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। इसी बीच बाजार में इंजेक्शन की मांग को देखते हुए इसकी कालाबाजारी भी शुरू हो गई। वहीं प्रदेश सरकार द्वारा जीवन रक्षक दवाइयों की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। बावजूद इसके लगातार इन दवाइयों की कालाबाजारी जारी है।