वाणिज्य कर विभाग: नियम कायदे ताक पर रखकर हो रही नियुक्ति

मुख्य आपत्ति इसी बात को लेकर है कि आखिरकार बिना कोरम पूरा हुए क्यों इतनी जल्दी यह बैठक की गई और क्या विभागीय अधिकारियों को नियम प्रक्रियाओं की जानकारी नहीं थी।

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश (madhya pradesh) के वाणिज्य कर विभाग (Department of Commerce) में नियम कायदों को ताक पर रखकर अपील बोर्ड के सदस्य की नियुक्ति (appointment) की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अपने को उपकृत करने को प्राप्त करने के लिए अधिकारियों ने इस मामले में ताबङतोङ तेजी दिखाई। यह शिकायत मंत्री के पास भी पहुंच गई। मध्यप्रदेश के वाणिज्य कर विभाग में अपीलों को सुनने और उनके अंतिम रूप से निपटारे के लिए अपील बोर्ड होता है।

इसमे तीन सदस्य न्यायिक विभाग से लिए जाते हैं व तीन अन्य सदस्य शासकीय होते हैं और इनमें एक सेवानिवृत्त (retired) वाणिज्य कर विभाग (Department of Commerce) का अधिकारी होना जरूरी है। खाली पड़े हुए वाणिज्य कर विभाग के पद के लिए मंगलवार को भोपाल में चयन बोर्ड (selection board) की बैठक हो गई। इस बैठक में मुख्य सचिव, विधि विभाग के प्रमुख सचिव और वाणिज्य कर विभाग के प्रमुख सचिव मौजूद थे लेकिन क्योंकि अपीलीय बोर्ड का चेयरमैन (chairman) का पद खाली पड़ा हुआ है। इसीलिए उनकी अनुपस्थिति में हुई। इस बैठक का औचित्य समझ से परे है। इस चयन बोर्ड की बैठक में अपीलीय बोर्ड के अध्यक्ष का होना जरूरी है। तभी कोरम पूरा होता है लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

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सूत्रों की मानें तो सुदीप गुप्ता नाम के सेवानिवृत्त वाणिज्य कर विभाग के अधिकारी को उपकृत करने के लिए आनन-फानन में यह बैठक की गई और उनके नाम पर मुहर लगा दी गई। अब यह फाइल लगभग अंतिम पड़ाव पर है और जल्द सुदीप के नाम की घोषणा होने वाली है। लेकिन मुख्य आपत्ति इसी बात को लेकर है कि आखिरकार बिना कोरम पूरा हुए क्यों इतनी जल्दी यह बैठक की गई और क्या विभागीय अधिकारियों को नियम प्रक्रियाओं की जानकारी नहीं थी।

इस पूरे मामले की शिकायत अब विभाग के मंत्री जगदीश देवड़ा (jagdish devda) के साथ-साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी की जा रही है। जिस अधिकारी सुदीप गुप्ता (sudeep gupta) की सदस्य के रूप में नियुक्ति (appointment) का प्रस्ताव है, उन पर लोकायुक्त (Lokayukta) ने गंभीर मामले दर्ज किए थे और वे 5 साल निलंबित भी रहे थे। लोकायुक्त मामले और शिकायतों के चलते उनकी 4 साल पदोन्नति भी अटकी रही थी और विभाग में उनकी छवि विवादास्पद अधिकारी के रूप में मानी जाती है।