अंतत जिंदगी की जंग हार गया प्रहलाद, 74 घंटे की मशक्कत भी नहीं बचा सकी जान

जैसे ही उसे बाहर निकाला गया, तत्काल एंबुलेंस उसे अस्पताल ले जाया गया लेकिन वहां पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। संभवत देश में चले किसी भी बोरवेल में फंसे बच्चे को निकालने के सबसे लंबे ऑपरेशन में आखिर मे असफलता हाथ लगी।

निवाड़ी, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश (madhya pradesh) के निवाड़ी जिले nivari district के सैतपुरा बारह गांव (satpura barah gaon) में बोरवेल में फंसे तीन साल के मासूम प्रहलाद कुशवाहा (prahlad kushwaha) को अंदर से निकाल लिया गया लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। 4 नवंबर को बोरवेल में गिरे प्रहलाद में बोरवेल में गिरने के कुछ घंटे बाद से ही हलचल बंद हो गई थी और इस बात की पूरी आशंका थी कि वह दम तोड़ चुका है।

बावजूद इसके एनडीआरएफ (NDRF) और सेना (ARMY) की टीम लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी रही और शनिवार रविवार की दरमियानी रात अंततः बच्चे को खोज निकालने में सफल रही। प्रहलाद को तत्काल झांसी मेडिकल कॉलेज ले जाने के लिए एंबुलेंस तैयार थी और उसके साथ डॉक्टर भी तैयार थे।

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जैसे ही उसे बाहर निकाला गया, तत्काल एंबुलेंस उसे अस्पताल ले जाया गया लेकिन वहां पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। संभवत देश में चले किसी भी बोरवेल में फंसे बच्चे को निकालने के सबसे लंबे ऑपरेशन में आखिर मे असफलता हाथ लगी। शनिवार की दोपहर भी इस बात की व्यापक संभावना थी कि बच्चे तक एनडीआरएफ की टीम पहुंच जाएगी लेकिन तब बताया गया कि सुरंग का सही पता लगाने में असफलता हाथ लगी है और बच्चे तक पहुंचने में अभी कुछ और वक्त लगेगा।

74 घंटे की इस कवायद में पुलिस और प्रशासन की टीम पूरी मशक्कत के साथ जुटी रही लेकिन कहीं ना कहीं एक सुनियोजित प्लान की कमी यह नजर आई कि आवश्यकता पड़ने के अनुसार एनडीआरएफ और सेना की टीमों को बुलाया गया और यदि बचाव दल को पहले से सुनियोजित ढंग से कार्य कराया जाता तो शायद बच्चे की जान बन जाती।

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