ठगी से पहले ही चिटफंड कंपनी पर लगे ताले, प्रशासन की सजगता से बचे निवेशक

निवाड़ी, मयंक दुबे।  आम तौर पर चिटफंड कंपनियों Chit fund companies) के झांसे में आकर लोग ठगी का शिकार हो जाते हैं वो अपने जीवन की गाढ़ी कमाई गवा देते हैं और फिर इसकी शिकायत करते हैं। लेकिन निवाड़ी जिले के कलेक्टर आशीष भार्गव की सजगता के चलते जिले के लोग ठगी का शिकार होने से बच गए। मामला निवाड़ी जिला मुख्यालय का है जहाँ लस्टीनेस जनहित को-ऑपरेटिव सोसायटी नाम की चिटफंड कंपनी (Chit Fund Company)जो लोगो से निवेश कराने की तैयारी में थी। उसे उपभोक्ताओं  के निवेश के पहले ही प्रतिबंधित कर दिया गया।

दरअसल जिले के एसपी आलोक कुमार(SP Alok Kumar) को जानकारी लगी के चिटफंड के नाम जिले के लोगों से निवेश कराने की तैयारी एक नई को-ऑपरेटिव सोसायटी जिले में खुली है जो संदेह के घेरे में है, उन्होंने जिला कलेक्टर को इसकी सूचना दी।  जिसके बाद कंपनी के ब्रांच संचालक राहुल यादव से बात कर जब इस चिटफंड कंपनी (Chit Fund Company) की प्रशासनिक अधिकारियों ने दस्तावेजों की जाँच की तो पाया कि इस कंपनी को उपभोक्ताओं से निवेश कराने के अधिकार ही नहीं हैं। दस्तावेज चैक करने के बाद कलेक्टर आशीष भार्गव (Ashish Bhargava) ने धारा 144 के तहत इस चिटफंड कंपनी (Chit Fund Company) की सभी शाखाओं को लेने देन के लिए  प्रतिबंधित कर दिया।

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गौरतलब है कि निवाड़ी में लस्टीनेस जनहित क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के नाम से एक चिटफंड कंपनी (Chit Fund Company) खोली गई थी और यह कम्पनी जल्द ही उपभोगताओं को पैसा दुगना कराने समेत तमाम वादे कर निवेश कराने वाली थी लेकिन निवेश के पूर्व जब प्रशासन ने इसके दस्तावेजों की पड़ताल की तो इस सोसायटी का मल्टी क्रेडिट को -ऑपरेटिव सोसाइटी में रजिस्ट्रेशन तो मिला लेकिन रजिस्ट्रार को-ऑपरेटिव सोसायटी की एनओसी नहीं थी साथ ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से निवेश प्राप्त करने की अनुमति भी इनके पास नहीं मिली जिसके बाद जिला कलेक्टर ने इस कंपनी को जिले में प्रतिबंधित कर दिया।

गौरतलब है कि प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान फर्जी चिटफंड कंपनियों के खिलाफ सख्त हैं और कार्रवाई के निर्देश दे रहे हैं ऐसे में प्रदेश का 52 वे जिले निवाड़ी निवेशकों का पैसा डूबने के पहले ही प्रशासन की सजगता से इसे प्रतिबंधित कर दिया गया शायद यह प्रदेश का पहला मामला होगा जब किसी चिटफंड कंपनी को निवेश होने के पूर्व प्रतिबंधित किया गया है।  हालाँकि प्रदेश में चिटफंडियों के मकड़जाल में फंस कर कई लोग लाखों रुपये की जालसाजी का शिकार होने के बाद अपना डूबा पैसा वापस पाने की चाह में सरकारी ऑफिस के चक्कर लगाने को मजबूर हैं ऐसे में निवाड़ी जिला प्रशासन की सजगता के चलते निवाड़ी में तो उपभोक्ताओं को ठगी का शिकार होने से बचा लिया गया लेकिन प्रदेश में ऐसी कई चिटफंड कंपनी हैं जिन पर कार्रवाई होना अब भी बाकी है।