लव जिहाद पर सख्त शिवराज सरकार, धर्म स्वातंत्र्य विधेयक में होंगे ये कठिन प्रावधान

प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chauhan) का भी कहना है कि दोषियों को 10 साल की सजा की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही 28 दिसंबर को होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र में इस विधेयक को पारित करने के लिए प्रस्तावित किया जाएगा।

शिवरज सरकार

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। यूपी (UP) में लव जिहाद (Love jihad) कानून लागू होने के बाद अब मध्य प्रदेश (madhya pradesh) में शिवराज सरकार (shivraj government) भी इस मामले में कदम आगे बढ़ा रही है। इसके साथ ही कहा गया है कि मध्य प्रदेश में लव जिहाद पर सख्त कानून बनाने के साथ-साथ कठोर नियम बनाए जाएंगे। शुरूआत में इस कानून में 5 साल सजा की बात कही गई थी लेकिन मध्य प्रदेश सरकार (Madhya pradesh government) और हिंदू संगठनों (Hindu organizations) की मांग पर सजा में बढ़ोतरी की बात कही जा रही है।

दरअसल राज्य सरकार ने पिछले दिनों धर्म स्वातंत्र्य विधेयक (Freedom of Religion Bill) पर कानून बनाकर को लेकर मध्य प्रदेश के प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा (Rameshwar sharma) ने अभी बात रखी है। रामेश्वर शर्मा ने कहा कि लव जेहाद कानून को समझने के लिए वह यूपी जा रहे हैं। जहां यूपी में बने लव जिहाद कानून पर वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (yogi adityanath) से चर्चा करेंगे। इसके साथ ही साथ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक के प्रावधान में अपराधी की सजा में बढ़ोतरी की मांग सबसे पहले रामेश्वर शर्मा ने की थी। उन्होंने 5 साल की जगह 10 साल सजा की मांग की थी।

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बता दें कि धर्म स्वातंत्र्य विधेयक मैं जबर्दस्ती धर्मांतरण कर विवाह करने पर 10 साल की सजा, विवाह के एक माह पूर्व कलेक्टर को विवाह और धर्मांतरण के लिए लिखित आवेदन सहित बगैर आवेदन प्रस्तुत के धर्मांतरण कराने वाली धर्मगुरु, काजी, मौलवी, पादरी को 5 साल की सजा, गैर जमानती अपराध आदि बातों को सम्मिलित किया जाएगा।

इस मामले में प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chauhan) का भी कहना है कि दोषियों को 10 साल की सजा की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही 28 दिसंबर को होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र में इस विधेयक को पारित करने के लिए प्रस्तावित किया जाएगा। वही अलग-अलग दृष्टिकोण से धर्म स्वातंत्र्य विधेयक में ऐसे प्रावधान किए जाएंगे। जिससे अदालत में कानून के किसी भी प्रावधान को चुनौती देने पर इससे निपटा जा सके।