BJP और MP By-Election के मायने! CM Shivraj ने रद्द किया अपना महत्वपूर्ण दौरा, जाने कारण

वही मप्र में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के लिए सीटों पर होने वाले उपचुनाव के परिणाम कई मायने में महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

दमोह उपचुनाव

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश (MP) में शिवराज सरकार (Shivraj government) 30 अक्टूबर को तीन विधानसभा क्षेत्रों और एक लोकसभा सीट (MP By-election) के लिए उपचुनावों के साथ एक और परीक्षा के लिए तैयार हैं। ऐसे मौसम में जहां भाजपा मुख्यमंत्री बदलने की होड़ में है, चुनावी परिणाम बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है।

ऐसे में BJP द्वारा तीनों विधानसभा और एक लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी गई है। बीजेपी ने विजय संकल्प के साथ दौरे की तैयारी की है। वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj singh chouhan) लगातार उपचुनाव वाले क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। साथ ही वह मेगा रोड शो (mega road show) करते हुए जनता से भी रूबरू हो रहे हैं।

बीजेपी द्वारा 16 से 21 अक्टूबर तक यह कार्यक्रम तय किए गए हैं। इस दौरान जहां महिलाओं के लिए स्व सहायता समूह सहित लाड़ली लक्ष्मी योजना और छात्रों को बड़ी राहत देने की घोषणा की गई है वहीं दूसरे चरण के कार्यक्रम की जिम्मेदारी सीएम शिवराज सहित बीजेपी अध्यक्ष वीडी शर्मा पर सौंपी गई है।

इसके अलावा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान रविवार को खंडवा और मांधाता में आम सभा और नुक्कड़ सभाओं को संबोधित करने वाले थे हालांकि अब उन्होंने अपने द्वारा निरस्त कर दिया है दरअसल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जानकारी दी है कि खंडवा खरगोन में भारी बारिश के कारण जन सुविधा को देखते हुए चुनावी सभा को स्थगित किया गया है। ऐसे में पिछले उपचुनाव के परिणाम को देखते हुए बीजेपी किसी भी गलती के लिए तैयार नहीं है। वही मप्र में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के लिए सीटों पर होने वाले उपचुनाव के परिणाम कई मायने में महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

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भौगोलिक दृष्टि से, चुनाव में जाने वाले विधानसभा क्षेत्र – जोबट, पृथ्वीपुर और रायगांव – राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित हैं। पृथ्वीपुर जहाँ बुंदेलखंड में है, रायगांव बघेलखंड में है और जोबट मालवा के अंतिम छोर पर है। जनसांख्यिकीय दृष्टि से रायगांव अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है, जोबट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है और पृथ्वीपुर सामान्य सीट है। दूसरे शब्दों में विधानसभा से पहले ये उपचुनाव का चुनावी परिणाम, न केवल राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में राजनीतिक मनोदशा का आंकलन होगा, बल्कि विभिन्न समुदायों और जातियों के बीच सरकार की स्थिति का भी प्रतिबिंब होगा।

बता दें कि कई नेताओं की मृत्यु के कारण सभी सीटें खाली हो गईं, इसलिए सहानुभूति वोट की मात्रा खेल में होगी। हालांकि, यह एकमात्र कारण नहीं होगा। डीजल और पेट्रोल की बढ़ती लागत बिजली की कटौती के रूप में एक महत्वपूर्ण कारण होगी। बिजली की कमी से अधिक, बिजली बिलों की वसूली और भुगतान में चूक करने वालों के खिलाफ संपत्ति की जब्ती की कार्यवाही जैसे मुद्दे हैं। डीजल के महंगे होने से बढ़ती कीमतों और खाद्य महंगाई का असर मतदान पर पड़ेगा। 5 अक्टूबर को राज्य के कई हिस्सों में डीजल की कीमतें 100 रुपये प्रति लीटर के स्तर को पार कर गईं। जिससे लोगों के मन में आक्रोश है।

मप्र में दमोह में हुआ पिछला उपचुनाव भाजपा के लिए बहुत अच्छा नहीं रहा। कांग्रेस विधायक राहुल लोधी ने अपनी सीट से इस्तीफा दे दिया था और भाजपा के टिकट पर उपचुनाव लड़ा था, लेकिन वह हार गए थे।ऐसे में ये उपचुनाव बीजेपी के लिए एक कड़ी परीक्षा साबित हो सकती है।