निकाय चुनाव

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश (madhya pradesh) में पंचायत चुनाव (panchayat election) से पहले नगरीय निकाय चुनाव (urban body elections) करवाई जाएंगी। इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई है। वहीं शिवराज सरकार (shivarj government) ने कमलनाथ (kamalnath) की एक इच्छा पूरी कर दी। अब महापौर अध्यक्ष के चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से होंगे। शिवराज सरकार ने राज्य निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर कहा कि नगर निकाय चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से ही कराया जाए। नगर निगम में महापौर और नगर पालिका के अध्यक्ष का चुनाव पार्षद करेंगे। हालांकि इस मामले में एक बार फिर से विवाद गरमाने की स्थिति सामने आ रही है।

दरअसल नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच प्रदेश में महापौर का चुनाव पार्षदों द्वारा कराए जाने के खिलाफ है। इसके लिए नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच सुप्रीम कोर्ट में रेस्टोरेशन याचिका (restoration petition) दायर करेगा। वही इस संबंध में प्रदेश के मुख्य सचिव को ईमेल भेजा गया है। इस मामले में नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के प्रांत अध्यक्ष पीजी नाजपांडे का कहना है कि राज्य सरकार ने वर्ष 2019 में निर्णय लिया था कि महापौर का चुनाव पार्षद द्वारा किया जाएगा।

इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार ने अधिसूचना जारी कर दिया था कि महापौर का चुनाव सीधे जनता के द्वारा कराया जाएगा। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस ले ली गई थी लेकिन एक बार फिर से सरकार अपनी बातों से पलट गई है और महापौर का चुनाव पार्षद द्वारा कराए जाने का निर्णय लिया गया है। जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जाएगी।

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बीते दिनों राज्य निर्वाचन आयुक्त बीपी सिंह ने कहा था कि नगरीय निकाय चुनाव पंचायत चुनाव से पहले कराए जाएंगे। वही Corona की तीसरी लहर मध्य प्रदेश को प्रभावित नहीं करती है तो सितंबर अक्टूबर में नगरीय निकाय चुनाव करा लिए जाएंगे और इसके बाद पंचायत चुनाव (panchayat election) की तैयारी की जाएगी। वही मंत्रालय सूत्रों की माने तो सरकारी नगरीय निकाय में चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराने का फैसला किया है इसके लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने राज्य चुनाव आयोग को पत्र भी जारी किए हैं।

बता दें कि मध्यप्रदेश में 2015 से महापौर अध्यक्ष के चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से होते रहे लेकिन कमलनाथ सरकार ने अप्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराने का फैसला किया था। हालांकि इस बात को शिवराज सरकार ने पलट दिया था लेकिन एक बार फिर से शिवराज सरकार द्वारा कमलनाथ की प्रणाली को सही मानकर इस प्रणाली को लागू करने का विचार किया गया है। दिसंबर 2020 में शिवराज सरकार ने कमलनाथ सरकार के आदेश को पलटते हुए महापौर-अध्यक्ष चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराने के आदेश जारी किए थे। हालांकि प्रस्तावित विधेयक को कैबिनेट से मंजूरी दे दी गई थी। वही सरकार का कहना है कि विधेयक को विधानसभा में मंजूरी नहीं मिली थी। जिसके कारण अप्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराए जा सकते हैं।

ज्ञात हो कि प्रदेश में कुल 407 नगरीय निकाय है। जिसमें से 347 में चुनाव कराए जाना है। दो चरण में मतदान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पहले चरण में 155 जबकि दूसरे चरण में 195 नगर निकाय में मतदान कराए जाएंगे। वही महापौर, अध्यक्ष का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से होगा। वही 7 नगरीय निकाय का कार्यकाल अभी बाकी है।