अपनों से घिरती जा रही शिवराज सरकार, उमा भारती के बाद अब इन्होंने की शराबबंदी की वकालत

वहीं उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने जिस तरह से शराबबंदी को लेकर अपनी इच्छा जाहिर की थी। उससे मैं पूरी तरह से सहमत हूं। 

शिवराज सिंह चौहान

जबलपुर, संदीप कुमार। मध्यप्रदेश में शराबबंदी करवाने को लेकर शिवराज सरकार अपने के बीच ही घिरती चली जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती-पूर्व मंत्री अजय विश्नोई के बाद अब पशुधन संवर्धन बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष स्वामी संत अखिलेश्वरानंद महाराज ने प्रदेश में शराबबंदी की वकालत की है। साथ ही उन्होंने उमा भारती के भी शराबबंदी बयान पर सहमति जताई है।

नर्मदा सेवा यात्रा के दौरान भी की गई थी शराबबंदी की मांग

मध्य प्रदेश गोपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरी महाराज ने कहा कि जिस समय मध्यप्रदेश में नर्मदा सेवा यात्रा निकाली जा रही थी। उस दौरान भी शराबबंदी को लेकर जोर दिया गया था। लिहाजा राज्य सरकार ने नर्मदा तट से लगे इलाकों में पूर्णता शराबबंदी के निर्देश भी दिए। जिसको की बाद में जाकर अमल में लाया भी गया। आज नर्मदा तट से लगे 200 से 300 मीटर दूर तक शराब दुकान नहीं है।

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एक दिन में नहीं हो सकती शराब बंद

स्वामी अखिलेश्वरानंद महाराज ने कहा कि निश्चित रूप से एक दिन में ही पूरे प्रदेश में शराबबंदी नहीं हो सकती पर अगर धीरे-धीरे इस और प्रयास किया जाएगा तो निश्चित रूप से प्रदेश में शराब बंद हो सकती है। अखिलेश्वरानंद महाराज ने कहा कि हम भी चाहते हैं कि प्रदेश में शराब बंद हो जाए। वहीं उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने जिस तरह से शराबबंदी को लेकर अपनी इच्छा जाहिर की थी। उससे मैं पूरी तरह से सहमत हूं।

राज्य सरकार को शराब से मिलता है एक बड़ा राजस्व

मध्य प्रदेश सरकार को शराब की बिक्री से एक बड़ा राजस्व मिलता है। यही वजह है कि गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी शराबबंदी को दरकिनार करते हुए प्रदेश में और शराब दुकान खोलने की बात कही थी। वहीं इसके उलट स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरी महाराज ने कहां की राजस्व के और भी विकल्प खोजे जा सकते हैं। आबकारी विभाग और अन्य कामों के जरिए भी अपना राजस्व बड़ा सकता है।  फिलहाल प्रदेश में शराबबंदी हो यही सभी की इच्छा है।

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