कुंभ मेला 2021: श्रद्धालुओं को रखना होगा इन बातों का ध्यान वरना नहीं मिलेगी एंट्री

कोरोना (Corona) के प्रकोप को देखते हुए केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) ने कुंभ को लेकर गाइडलाइन (Guideline) जारी कर दी है। इसमें केंद्र ने उत्तराखंड सरकार (Government of Uttarakhand) को कुंभ के आयोजन के संबंध में सभी प्रदेशों में व्यापक प्रचार-प्रचार करने के निर्देश दिए हैं।

कुंभ

देहरादून, डेस्क रिपोर्ट। शिव की नगरी हरिद्वार (Haridwar) में 27 फरवरी से 30 अप्रैल तक कुंभ मेला 2021 (Kumbh Mela 2021) शुरु होने जा रहा है। इस दौरान छह स्नान पर्व होंगे। कुंभ के दौरान सामान्य दिनों में प्रतिदिन 10 लाख और स्नान पर्व के दिनों में 50 लाख लोगों के आने का अनुमान है, इसको लेकर तैयारियां जोरों पर चल रही है और साधु-संतों (Saints का भी घाटों पर पहुंचने का सिलसिला शुरु हो गया है, लेकिन इसमें वही श्रद्धालु और साधु-संत शामिल हो सकेंगे जिनकी आरटीपीसीआर टेस्ट (RTPCR TEST) की निगेटिव रिपोर्ट (Report Negative) होगी।

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दरअसल, कोरोना (Corona) के प्रकोप को देखते हुए केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) ने कुंभ को लेकर गाइडलाइन (Guideline) जारी कर दी है। इसमें केंद्र ने उत्तराखंड सरकार (Government of Uttarakhand) को कुंभ के आयोजन के संबंध में सभी प्रदेशों में व्यापक प्रचार-प्रचार करने के निर्देश दिए हैं। वही कुंभ की अवधि कम करने पर भी विचार करने को कहा है। मेले में 27 फरवरी को माघ पूर्णिमा, 11 मार्च को महाशिवरात्रि, 12 अप्रैल को सोमवती अमावस्या, 14 अप्रैल को बैसाखी, 21 अप्रैल को राम नवमी और 27 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा के शाही स्नान होगा, इसको लेकर भी केन्द्र ने विशेष ध्यान और सतर्कता रखने को कहा है।

क्या है कुंभ

हिंदू धर्म (Hindu Religion) में कुंभ मेले का बहुत अधिक महत्व है। भारत (India) में हर 12 साल में चार जगह हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक में कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है।मान्यता है कि जब बृहस्पति कुंभ राशि में और सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है तो कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है। कुंभ का अर्थ है- कलश, ज्योतिष शास्त्र में कुंभ राशि का भी यही चिह्न है।हरिद्वार में गंगा (Ganga in Haridwar), उज्जैन में शिप्रा (Shipra in Ujjain), नासिक में गोदावरी (Godavari in Nashik और इलाहाबाद में त्रिवेणी संगम (Triveni Sangam in Allahabad) जहां गंगा, यमुना और सरस्वती मिलती हैं, कुंभ मनाया जाता है।

कुंभ के लिए जारी गाइडलाइन के मुख्य बिंदु 
  • कुंभ मेले में तैनात होने वाले स्वास्थ्य कर्मियों और अग्रिम पंक्ति के कार्मिकों को प्राथमिकता के तौर पर कोरोना से बचाव का टीका लगाया जाए।
  • केवल टीका लगवाने वाले कार्मिकों को ही कुंभ मेले में तैनाती दी जाए।
  • कुंभ मेले में आने वाले सभी श्रद्धालुओं का रजिस्ट्रेशन और स्वास्थ्य प्रमाण पत्र लाना अनिवार्य किया जाए।
  • मेले में 65 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों, गर्भवती महिलाओं, 10 साल से कम उम्र के बच्चों और गंभीर बीमारी से पीडि़त व्यक्तियों को आने से हतोत्साहित किया जाए।
  • सरकारी बुजुर्ग कार्मिक, गर्भवती कार्मिक और बीमार कार्मिकों को अग्रिम पंक्ति के कार्यों में शामिल नहीं किया जाए।
  • श्रद्धालु अधिकतम 72 घंटे पूर्व की आरटी-पीसीआर टेस्ट रिपोर्ट में नेगेटिव पाए जाने पर ही कुंभ क्षेत्र में प्रवेश कर पाएंगे।
  •  रज्य सरकार को अमरनाथ यात्रा के तर्ज पर श्रद्धालुओं की पंजीकरण की व्यवस्था करनी होगी।
  • मेले को कोविड संक्रमण से बचाने के लिए दूसरे राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को 72 घंटे पूर्व तक की आरटी- पीसीआर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
  • सरकार ने 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों, बीमार और गभर्वती महिलाओं के साथ ही दस साल से कम उम्र के बच्चों को भी कुंभ के प्रति हतोत्साहित करने के लिए कहा है। राज्य सरकार इसके लिए अन्य राज्य सरकारों के साथ भी समन्वयक स्थापित करेगी।

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