Strike: बुधवार से मध्य प्रदेश के परिवहन कार्यालयों में तालाबंदी, समस्याओं को लेकर उठाया कदम

हड़ताल
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भोपाल डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश के सभी परिवहन कार्यालयों में 7 अप्रैल से हड़ताल (Strike) रहेगी। परिवहन विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों ने अपने साथ लगातार हो रहे अन्याय की बात कहकर यह निर्णय लिया है ।उनका मानना है कि पिछले कई वर्षों से उनकी कई मांगे सरकार के सामने लंबित हैं लेकिन सरकार कोई निर्णय नहीं ले रही है।

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कोरोना के काल में भी सरकार का खजाना भरने वाले परिवहन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी सरकार से नाराज हैं। उनका कहना है कि वह कई वर्षों से अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन परिवहन आयुक्त एवं शासन स्तर तक देते रहे हैं और अपनी जायज मांगे उठाते रहे हैं। लेकिन सिवाय आश्वासनों के सरकार ने उन्हें कुछ नहीं दिया। इतना ही नहीं कोरोना संक्रमण काल में, जब पूरे विश्व सहित देश और प्रदेश में मंदी छाई थी, परिवहन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों ने विषम परिस्थितियों के बावजूद वित्तीय वर्ष का लक्ष्य पूरा कर सरकार का खजाना भरा है। बावजूद इसके शासन उनकी लगातार अवहेलना कर रहा है, जिसके चलते 7 अप्रैल से पूरे मध्यप्रदेश में परिवहन विभाग के सभी अधिकारी कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल (Strike) पर रहेंगे।

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(Strike) उनका कहना है कि अधिकारियों द्वारा शासन के आदेश एवं अधिनियम और नियमों को दरकिनार करते हुए विभाग के अधिकारी कर्मचारियों पर लगातार आपराधिक प्रकरण दर्ज हो रहे हैं जबकि सरकार का साफ नियम है कि बिना अपराध की जांच के किसी लोकसेवक पर प्रकरण दर्ज नहीं हो सकता है। मध्यप्रदेश कराधान अधिनियम में भी यह प्रबंध किया गया है कि सद्भावना पूर्व किए गए कार्य के संबंध में कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी। परिवहन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि उनके द्वारा किए जाने वाले कार्य अर्ध न्यायिक प्रकृति के होते हैं और इसलिए उन्हें न्यायाधीश संरक्षण अधिनियम 1985 के तहत संरक्षण दिया जाना चाहिए लेकिन उस पर कोई विचार नहीं किया गया है। इन सब की अवहेलना करते हुए दो दिन पहले ही जिला परिवहन अधिकारी टीकमगढ़ सहित रायसेन व एक सेवानिवृत्त उप परिवहन आयुक्त के खिलाफ अधिनियम और शासन के आदेशों की अवहेलना करते हुए एफ आई आर दर्ज की गई है जिसका संगठन पुरजोर विरोध करता है।

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हड़ताल का तत्कालीन कारण अधिकारियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करना बताया गया है। इसके साथ-साथ यह भी कहा गया है कि कार्यालय स्टाफ की कमी के चलते अधिकारी और कर्मचारियों पर मानसिक दबाव रहता है। प्रवर्तन अमले को मुख्यालय में अटैच कर दिया जाता है जबकि यहां पर इनकी किसी प्रकार की पद संख्या नहीं है। जब भी कोई यात्री वाहन दुर्घटनाग्रस्त होता है तो बिना जांच मध्य प्रदेश परिवहन संगठन के पदाधिकारियों एवं सदस्यों की मंगलवार को हुई बैठक बैठक में यह निर्णय लिया गया है। इस निर्णय की प्रति मध्य प्रदेश के परिवहन आयुक्त सहित मुख्यमंत्री के निजी सचिव, परिवहन मंत्री के निजी सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव परिवहन, विभाग को भेजी गई है।

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किए जिला परिवहन अधिकारी को निलंबित कर दिया जाता है। इसके साथ-साथ परिवहन विभाग में आरक्षक से लेकर संभागीय परिवहन आयुक्त के पदों में अन्य विभागों की तुलना में काफी वेतन विसंगतियां हैं। लंबे समय से पदोन्नति पर रोक लगी हुई है और इसलिए पद नाम परिवर्तन करने की मांग की गई लेकिन इसे भी ठुकरा दिया गया है। कार्यालय स्टाफ को वर्दी की मांग भी आश्वासन देकर समाप्त कर दी गई और कर्मचारियों के लिए परिवहन उपनिरीक्षक की भर्ती परीक्षा आयोजित नहीं की गई जिससे कई लोग उसी पद पर रिटायर हो गए। इन सब वजहों से कर्मचारी अधिकारी 7 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल (Strike) पर जा रहे हैं और उन्होंने जनता से आग्रह किया है कि वे इन दिनों कार्यालय नहीं आए।