नगरीय निकाय चुनाव: ईवीएम की जांच शुरू, मतदान केंद्रों की संख्या में होगा इजाफा

नगरीय निकाय चुनाव (Urban body elections) में पिछले चुनाव के मुकाबले केंद्रों के बढ़ने की संभावना है। कोरोना (Corona) संक्रमण को देखते हुए केंद्रों की संख्या को बढ़ाने का निर्णय लिया गया है ताकि मतदाता को वोटिंग (voting) के लिए ज्यादा परेशानियों का सामना ना करना पड़े।

नगरीय निकाय चुनाव

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश (Madhya pardesh) में विधानसभा उपचुनाव (By-Election) के परिणाम आने के बाद नगर निकाय चुनाव कराए जाने की संभावना तेज हो गई है। माना जा रहा है कि दिसंबर महीने में नगरीय निकाय चुनाव (Body election) करवाया जा सकता है।

चर्चा है कि 1 जनवरी 2020 से नए मतदाताओं के नाम को सूची में शामिल करने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। जिसके बाद अगले 4 या 5 माह तक चुनाव नहीं करवाए जा सकेंगे। जिसके लिए निकाय चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी गई है। नगरीय निकाय चुनाव में नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष के लिए मुक्त चुनाव चिन्ह घोषित कर दिए गए हैं। वहीं अब निकाय चुनाव के लिए केंद्र और ईवीएम (EVM) को लेकर भी तैयारी शुरू कर दी गई है।

दरअसल नगरीय निकाय चुनाव (Urban body elections) में पिछले चुनाव के मुकाबले केंद्रों के बढ़ने की संभावना है। कोरोना (Corona) संक्रमण को देखते हुए केंद्रों की संख्या को बढ़ाने का निर्णय लिया गया है ताकि मतदाता को वोटिंग (voting) के लिए ज्यादा परेशानियों का सामना ना करना पड़े। इसके लिए 1000 से ज्यादा मतदाता होने की संख्या में मतदान केंद्रों को शिफ्ट करने का विचार किया गया है। वहीं दूसरी तरफ मतदाता की सुविधा को देखते हुए नए मतदान केंद्र पहले मतदान केंद्र के नजदीक ही रखे जाने के निर्णय लिए गए हैं। संयुक्त कलेक्टर संजय श्रीवास्तव ने कहा कि पिछले चुनाव में 1765 मतदान केंद्र थे। जबकि इस बार 2 हज़ार या इससे अधिक केंद्र बनाये जा सकते हैं।

इस मामले में संयुक्त कलेक्टर और उप जिला निर्वाचन अधिकारी संजय श्रीवास्तव (Deputy District Election Officer Sanjay Srivastava) ने बताया कि नगरीय निकाय चुनाव के लिए ईवीएम (EVM) जांच की प्रक्रिया भी मैं भी तेजी लाई गई है। करीबन 8000 से अधिक ईवीएम को तैयार किया गया है। जिसकी पहले प्रक्रिया में चेकिंग की जा चुकी है। वही ईवीएम की गड़बड़ी को भी बार-बार चेक किया जा रहा है ताकि नगरीय निकाय चुनाव में मतदाताओं को ऐसी परेशानियों का सामना ना करना पड़े।

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बता दें कि इससे पहले बीते दिनों नगर निकाय चुनाव में अनाप-शनाप खर्च पर लगाम लगाते हुए सरकार ने पार्षदों की अधिकतम सीमा को तय कर दिया था। इसके साथ ही साथ निगम पालिका और नगर परिषद के लिए भी अलग-अलग सीमा राशि तय की गई थी। वहीं इससे पहले नगरपालिका विधि अधिनियम में संशोधन के लिए अध्यादेश जारी कर दिया गया। जिसके तहत प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराए जाने की बात कही गई थी।

बता दें कि सत्ता में आने के बाद कांग्रेस सरकार ने नगरीय निकाय चुनाव में अध्यक्षों के प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराए जाने के नियम में बदलाव किया था। जिसके बाद एक बार फिर से सत्ता में वापसी के बाद शिवराज सरकार ने इस नियम को पलटते हुए नगर निकाय चुनाव में अध्यक्षों के प्रत्यक्ष प्रणाली चुनाव को मंजूरी दे दी थी।

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