नगरीय निकाय चुनाव: तैयारियां शुरू, मुक्त चिन्ह घोषित, दिसंबर में हो सकते हैं चुनाव

नगरीय निकाय चुनाव को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई है। जिसके लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर निगम के महापौर(mayor) और नगर पालिका और परिषद के अध्यक्ष के लिए मुक्त चुनाव चिन्ह घोषित कर दिए हैं।

नगरीय निकाय चुनाव

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश(madhya pardesh) में विधानसभा के उपचुनाव(by election) के परिणाम आने के बाद नगरीय निकाय चुनाव(Urban body elections) और पंचायती राज चुनाव होने की संभावना तेज हो गई है। वही चर्चा है कि नगरीय निकाय चुनाव दिसंबर(december) माह में कराए जा सकते हैं।जानकारों का कहना है कि अगर ऐसा नहीं होता है तो 1 जनवरी 2020 से नए मतदाताओं के नाम की सूची शामिल करने का काम शुरू हो जाएगा। जिसके बाद 3-4 महीने तक फिर से नगरीय निकाय चुनाव के टलने की संभावना तेज हो जाएगी।

दरअसल नगरीय निकाय चुनाव को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई है। जिसके लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर निगम के महापौर(mayor) और नगर पालिका और परिषद के अध्यक्ष के लिए मुक्त चुनाव चिन्ह घोषित कर दिए हैं। वही कहा जा रहा है कि चुनाव चिन्ह का आवंटन “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर निश्चित किया जाएगा। वही नगरपालिका विधि अधिनियम में संशोधन के लिए अध्यादेश भी जारी कर दिया गया है। जिसके तहत प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराए जाने की बात कही गई है। वहीं आयोग ने तय किया है कि मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के लिए आरक्षित चुनाव चिन्ह को छोड़कर बाकी चिन्ह को मुक्त श्रेणी में रखा जाएगा।

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इधर नगर निगम के महापौर, नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्षों के लिए 37 मुक्त चुनाव चिन्ह घोषित किए गए हैं। जिनमें नल, टेबल, पंखा, गुब्बारा, स्लेट, कांच का गिलास, रेडियो, बल्लेबाज, मटका, गाड़ी, बैटरी, टॉर्च, पीपल का पत्ता, हारमोनियम, हाथ चक्की, डबल रोटी, ब्रश, बल्ला, वाइलन और बेलन जैसी कई चिन्हों को शामिल किया गया है।

वही पार्षदों के लिए 31 मुक्त चिन्ह घोषित किए गए हैं। जिसमें केक, कैमरा, गाजर, नाव, स्कूटर, अलमारी, लेटर बॉक्स, हॉकी और गेंद, डीजल पंप, तलवार और ढाल, नारियल का पेड़, कैची, बाल्टी, कमीज, केतली, भोपू, प्रेस, टेलीफोन और टेलीविजन जैसे चिन्हों को शामिल किया गया है।

बता दें कि बीते दिनों की नगर निकाय चुनाव में अनाप-शनाप खर्च पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने पार्षदों के अधिकतम खर्च की सीमा तय कर दी है। इसके साथ ही साथ नगर निगम पालिका और नगर परिषद के लिए अलग-अलग सीमा तय की गई है। जिसमें महापौर के लिए अधिकतम 35 लाख खर्च की सीमा तय हुई है। वही अध्यक्ष पद के लिए 10 लाख और पार्षदों के लिए 8 लाख 75 हजार अधिकतम निर्वाचन व्यय तय किया गया है।

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