New Tax Regime: अप्रैल महीने की शुरुआत के साथ-साथ बजट 2025-26 भी लागू होने जा रहा है। इनकम टैक्स से जुड़े नए नियम भी प्रभावी हो जाएंगे। लोगों नई कर व्यवस्था और पुरानी कर व्यवस्था को लेकर कन्फ्यूजन में हैं। उन्हें समझ नहीं रहा है कौन का टैक्स रिजिम बेहतर है। दोनों ही कर व्यवस्थाएं अपने आप में खास हैं। कई लाभ मिलते हैं।
पुरानी कर व्यवस्था 80सी, 80डी, एचआरए इत्यादि सुविधाएं ऑफर करता है। अलग-अलग टैक्स स्लैब होता है। निवेश और बचत टैक्स सेविंग के साथ करने का ऑप्शन भी देता है। वहीं नई कर व्यवस्था कम टैक्स रेट्स ऑफर करती है। छूट काफी सीमित है। हालांकि यह पुरानी व्यवस्था की तुलना में अधिक सिम्पल साबित हो सकती है। इसमें 12 लाख रुपये तक की इनकम पर टैक्स नहीं लगता। नागरिक अपनी जरूरत के हिसाब से दोनों में से किसी का भी चुनाव कर सकते हैं। नए टैक्स रिजिम के तहत टैक्सपेयर्स को तीन तरह के छूट का लाभ मिलता है। जिसकी जानकारी होना जरूरी है।

एनपीएस पर मिलेगी ये छूट
नए टैक्स रिजिम के तहत नियोक्ता द्वारा नेशनल पेंशन सिस्टम में किए गए अंशदान पर टैक्स डिडक्शन का लाभ मिलता है, जो धारा 80सीसीडी (2) के तहत प्रभावी है। नियोक्ता का योगदान कर्मचारी के मूल वेतन और महंगाई भत्ते का 10% हो सकता है, जो टैक्स फ्री होगा। कर्मचारी की ओर से किए गए अंशदान पर कोई छूट नहीं मिलती।
इन 2 टैक्स डिडक्शन के बारे में भी जानें
- सरकारी कर्मचारियों रिटायरमेंट के समय मिलने वाली ग्रेच्युटी भी टैक्स फ्री होगी, जो धारा 10(10) के तहत लागू है। हालांकि गैर-सरकारी कर्मचारियों के लिए ज्यादा से ज्यादा 20 लाख रुपये तक की ग्रेच्युटी ही टैक्स मुक्त रहेगी।
- वेतनभोगी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए स्टैन्डर्ड डिडक्शन लागू होता है। नए टैक्स रिजिम में इसे बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया है।