सैल्यूट: युवा अफसरों की मेहनत करेगी इंदौर में ऑक्सीजन की कमी पूरी

इन्दौर, आकाश धोलपुरे– कोरोना के इस काल में मालवा अंचल के लिए बड़ी खुशखबरी है। युवा अधिकारियों की टीम ने यहां पर एक बंद पड़ा ऑक्सीजन प्लांट शुरू कर दिया है जो सोमवार से ऑक्सीजन का उत्पादन शुरू कर देगा। युवा इसे तैयार करने में दिन-रात जुटे हैं।

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एक ऐसे समय में जब पूरा देश ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहा है और कोरोना मरीजो को जीवन मृत्यु से संघर्ष करना पड़ रहा है, मध्य प्रदेश के एमपी आईडीसी के अधिकारियों ने अपनी सूझबूझ और मेहनत से एक ऐसा काम करके दिखाया है जो देश मे उदाहरण बन गया है।

दरअसल धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में मित्तल कॉरपोरेशन का ऑक्सीजन प्लांट बंद पड़ा था। मित्तल बंधुओं ने इसे कलेक्टर मनीष सिंह के सामने सौंपने का प्रस्ताव रखा और कलेक्टर ने एमपीआईडीसी के कार्यकारी संचालक रोहन सक्सेना को यह काम सौंपा। रोहन ने अपनी टीम इंजीनियर मार्तण्ड सिरोलिया, आशुतोष नामदेव और मित्तल कार्पोरेशन की तकनीकी टीम के मनीष अग्रवाल के साथ काम शुरू किया। हालांकि इस काम में शुरुआत में एक महीने का वक्त लगने की बात कही गई थी। लेकिन अधिकारी जी जान से जुट गए और सात दिन के भीतर ही सारा सामान मंगा कर इसे तैयार करने में सफलता प्राप्त कर ली।

इस ऑक्सीजन प्लांट को अब तैयार कर लिया गया है और प्रारंभिक टेस्टिंग भी शुरू हो गई है। पूरी उम्मीद इस बात की है कि इस प्लांट से सोमवार से 30 टन ऑक्सीजन हवा से बन सकेगी। युवा अधिकारियों का कहना है कि इसके शुरू होने से ऑक्सीजन सिलेंडर भरने की क्षमता दस हजार सिलेंडर प्रति दिन से भी ज्यादा हो जाएगी। इसके साथ ही 10 टन लिक्विड ऑक्सीजन कैप्सूल भी प्लांट के पास हैं जिनमें स्टॉक भी किया जा सकेगा।

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ऑक्सीजन के इस संकट में युवा अधिकारियों का यह प्रयास से निश्चित रूप से सराहनीय है और यह भी बताता है कि यदि दिल में जज्बा हो, कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो कुछ भी असंभव नहीं। कोरोना के इस संकट काल में यह अधिकारी भी किसी कोरोना वारियर्स से कम नहीं।

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