बिना प्रेगनेंट हुए जुड़वां बच्चों की मम्मी बनी प्रीति जिंटा, क्या है ये तकनीक और किनके लिए है फायदेमंद

भारत में सरोगेसी पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानून पारित होने के बाद अब केवल इनफर्टाइल प्रमाण पत्र वाली महिला की मदद के लिए ही ऐसा किया जा सकता है।

मुंबई, डेस्क रिपोर्ट। बॉलीवुड की डिंपल गर्ल प्रीति जिंटा जुड़वां बच्चों की मम्मी बन गई हैं। 46 साल की उम्र में प्रीति को मां बनने की खुशी मिली है। साइंस की तरक्की का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रीति बिना गर्भधारण किए ही मां बन गई हैं। इस खुशी को हासिल करने के लिए प्रीति ने सेरोगेसी का सहारा लिया है। आपको बता दें इस तकनीक से फैमिली प्लान करने वाली प्रीति पहली अदाकारा नहीं है, उनके अलावा भी कई बॉलीवुड सेलिब्रेटीज इसी तकनीक से अपने घर में किलकारियां सुन चुके हैं।

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इस लिस्ट में मशहूर अदाकार शिल्पा शेट्टी का नाम भी शामिल है, जिनकी बेटी सेरोगेसी से हुई है। शाहरूख के बेटे अब्राहम भी सेरोगेसी का ही वरदान है। आमिर खान और किरण राव के बेटे आजाद भी सेरोगेसी की बदौलत ही दुनिया में आए हैं। तुषार कपूर ने भी अपने बच्चे को लिये सरोगेसी का सहारा लिया।

चलिए जानते है सेरोगेसी की तकनीक और क्या हैं भारत में इसके नियम

बिना प्रेगनेंट हुए जुड़वां बच्चों की मम्मी बनी प्रीति जिंटा, क्या है ये तकनीक और किनके लिए है फायदेमंद

क्या होती है सेरोगेसी?

सेरोगेसी को दूसरे शब्दों में किराए पर ली हुई कोख कहा जा सकता है। सेरोगेसी में कोई महिला शल्य क्रिया कराकर किसी और के एग्स से भी गर्भ धारण कर सकती है।

कौन ले सकते हैं सेरोगेसी की मदद?

सेरोगेसी का सहारा लेने की कई वजहें हो सकती हैं। अगर किसी कपल के सामान्य प्रक्रिया से बच्चे नहीं हो पा रहे हों तो वो सेरोगेसी का सहारा ले सकते हैं। अगर किसी महिला को गर्भधारण करने पर जान का खतरा हो तो वो दूसरी महिला को सेरोगेट के रूप में चुन सकती हैं। इसके लिए दोनों पक्षों का इस मामले पर सहमत होना जरूरी है। ज्यादा उम्र के बाद शादी होने पर महिलाएं प्रेग्नेंसी का रिस्क लेने की जगह सेरोगेट मदर चुनना ज्यादा पसंद करती हैं।

कितने तरह की सेरोगेसी

ये प्रक्रिया दो तरह से हो सकती है। एक सेरोगेसी में पिता के स्पर्म एक्सेप्ट करने वाली महिला ही सेरोगेट होती है। इस केस में पिता का संबंध ही जेनेटिकल होता है। दूसरे केस में पिता का स्पर्म और मां के एग्स को टेस्टट्यूब में रखा जाता है फिर सेरोगेट मदर में ट्रांसफर किया जाता है। इस केस में सेरोगेसी करवाने वाले माता पिता ही कानूनन और जेनेटिकल दोनों माता-पिता होते हैं।

भारत में नियम

सेरोगेसी तकनीक के प्रचलन में आने के बाद भारत में आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को इसके लिए उपयोग किया जाने लगा था। जिसके बाद मजबूरन इस प्रक्रिया पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। 2019 में प्रतिबंध के बाद सिर्फ मदद के लिए सेरोगेसी का विकल्प खुला था। अब सेरोगेसी के लिए चुनी गई महिला के पास मेडिकली फिट होने का सर्टिफिकेट होना चाहिए, साथ ही सेरोगेसी करवाने वाली महिला के पास भी खुद के इनफर्टाइल होने का सर्टिफिकेट होना चाहिए।  2020 में आए सेरोगेसी रेगुलेशन बिल 2020 में कुछ सुधार किए गए हैं इसके तहत किसी भी महिला को सेरोगेट बनने की अनुमति दी गई है।