बालिकाओं के लिए CM Shivraj के बड़े ऐलान, मिलेगी अन्य सुविधाएं, राज्य स्तर पर होगा आयोजन

MP Ladli laxmi yojana: चालू वित्त वर्ष के पहले छह माह में 1.31 लाख लड़कियों का लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत पंजीयन किया गया है।

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश (MP) में लाडली लक्ष्मी योजना (Ladli laxmi yojana) के तहत बालिकाओं के लिए बड़े ऐलान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj singh chouhan) ने किए है। बीते दिनों मंत्रालय में लाडली लक्ष्मी योजना 2.0 Ladli laxmi yojana 2.0) की समीक्षा बैठक करते हुए सीएम शिवराज (CM Shivraj) ने कहा कि बालिकाओं को सारी सुविधाओं का लाभ मिलना चाहिए। इसके साथ ही साथ ब्लॉक, ग्राम पंचायत और जिला स्तर पर भी लाडली लक्ष्मी दिवस (Ladli laxmi diwas) का आयोजन किया जाना चाहिए।

CM Shivraj ने कहा कि राज्य, जिला, ब्लॉक, ग्राम पंचायत स्तर पर लाड़ली लक्ष्मी दिवस का आयोजन किया जाये।मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि अनाथ बालिकाओं को लाड़ली लक्ष्मी योजना में जोड़ा जाये। CM Shivraj मंत्रालय में महिला एवं बाल विकास विभाग की लाड़ली लक्ष्मी योजना 2.0 की समीक्षा कर रहे थे।

सीएम शिवराज ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्राम पंचायतों एवं ग्रामों को लाड़ली लक्ष्मी फ्रेंडली घोषित करने के मापदंड तय कर लिये जायें।  इसके अलावा भी उन्हें कई तरह कि सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि 18 वर्ष के ऊपर की लाड़ली लक्ष्मी को ड्राइविंग लाइसेंस जारी किये जाये।

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बता दें कि 2007 में लाडली लक्ष्मी योजना का क्रियान्वयन शुरू किया गया था। जिसका उद्देश्य लड़कियों की सामाजिक और शैक्षिक स्थिति में सुधार करना और विषम लिंगानुपात को भी सुधारना है। वहीँ सीएम शिवराज ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के पहले छह माह में 1.31 लाख लड़कियों का लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत पंजीयन किया गया है।

मुख्यमंत्री चौहान ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि लाड़ली बालिकाओं के शासकीय-अशासकीय मेडिकल, इंजीनियरिंग, आईआईटी, आईआईएम में प्रवेश पर पढ़ाई का खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। उन्होंने कहा कि लाड़ली बालिका कॉलेज में प्रवेश लेगी तो उसे 25 हजार रूपये दिये जायेंगे।

सीएम ने बीते दिनों Scholarship कि राशि लाड़लियों के कहते में भेजे जाने के साथ कहा था कि आज मुझे खुशी है कि मध्य प्रदेश में 41 लाख लाड़लियां हो गई हैं। इस योजना का सुखद परिणाम यह है कि मध्य प्रदेश में पुत्र-पुत्रियों के लिंगानुपात में समानता रही है। बेटियां बोझ नहीं वरदान हैं।