इंदौर: स्थिति नियंत्रण में, कोरोना के बाद ब्लैक फंगस के 15 मरीज अस्पताल से डिस्चार्ज

ब्लैक फंगस के जिन मरीजो को इंजेक्शन की जरूरत है उन्हें सरकार द्वारा मुहैया कराकर इंजेक्शन लगाए जा रहे है। वही जिनका इलाज दवाई से हो सकता है उन्हें दवाई दी जा रही है।

इंदौर, आकाश धोलपुरे। कोरोना महामारी (corona pandemic) के बाद ब्लैक फंगस (black fungus) जैसी बीमारी चुनौती बनकर सामने आई है।इंदोर (indore) में जिस तरह से कोरोना संक्रमण के मामलो में कमी आने से राहत मिली थी। वही अब ब्लैक फंगस के मरीज भी ठीक होकर अपने घर जा रहे है। शुक्रवार को शहर के एम.वाय. अस्पताल (MY Hospital) से ब्लैक फंगस से ठीक होकर 15 मरीज डिस्चार्ज (discharge) होकर अपने घर को रवाना हुए। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संजय दीक्षित ने बताया कि एमवाय अस्पताल से ब्लैक फंगस से ग्रसित 15 मरीजो का सफलता पूर्वक इलाज किया गया है।

जिसके बाद शुक्रवार को उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया है डॉक्टर्स की एक टीम लगातार इन मरीजों के संपर्क में रहेगी और उनसे फीडबैक लेगी। वही एम.वाय. अस्पताल के अधीक्षक पीएस ठाकुर ने बताया कि अस्पताल में ब्लैक फंगस के कुल 282 मरीज है जिनमे से 15 मरीजो को डिस्चार्ज किया जा रहा है बाकी बचे हुए मरीजो के इलाज के लिए एम.वाय. अस्पताल के कई विभागों के डॉक्टर पूरी मेहनत कर रहे है।

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उन्होंने बताया कि ब्लैक फंगस के जिन मरीजो को इंजेक्शन की जरूरत है उन्हें सरकार द्वारा मुहैया कराकर इंजेक्शन लगाए जा रहे है। वही जिनका इलाज दवाई से हो सकता है उन्हें दवाई दी जा रही है। डॉ.पीएस ठाकुर ने बताया कि ब्लैक फंगस से ग्रसित मध्यप्रदेश के लगभग आधे मरीज इंदोर में अपना उपचार करा रहे है।

वही जिन मरीजो में आंखों में इंफेक्शन फैलकर मस्तिष्क तक पहुंचने की स्थिति में था। उन मरीजो का इलाज के दौरान ऑपरेशन कर आंखे निकाली गई है। हालांकि उन्होंने ये भी साफ किया कि ऐसे मरीजो की संख्या बहुत ही कम है। बता दे कि ब्लैक फंगस के प्रकोप से स्वस्थ्य होकर अपने घर लौट रहे लोगों के चेहरे पर ख़ुशी साफ़ साफ़ दिखाई दे रही थी। डिस्चार्ज हुए मरीजों की संख्या भले ही कम हो लेकिन ये खबर इंदौर सहित समूचे प्रदेश के लिए राहत भरी है।