भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश सरकार (Madhya pradesh government) द्वारा बीते दिनों शिवराज कैबिनेट (cabinet) में पास किए गए एक प्रस्ताव पर विवाद शुरू हो गया है। दरअसल बीते दिनों शिवराज सरकार (shivraj government) ने रेत कारोबारियों को राहत देने का प्रस्ताव कैबिनेट (cabinet) में पास किया। जिसका अब शिवराज के मंत्री ही विरोध कर रहे हैं। अब तक इस मामले में कई मंत्रियों (ministers) के बयान सामने आ चुके हैं।

दरअसल मंगलवार को हुई शिवराज कैबिनेट की बैठक में शिवराज सरकार द्वारा रेत कारोबारियों (sand merchants) को राहत देने का प्रस्ताव (Proposal) मान्य ने किया गया है। इस प्रस्ताव पर शिवराज सरकार के मंत्रियों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। मामले में खेल मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया (Yashodhara Raje Scindia) ने कहा कि रेत कारोबारियों को राहत देने की जगह सीएम रिलीफ फंड (CM Relief Fund) के लिए उनसे मोटा पैसा वसूल करना चाहिए। जबकि कृषि मंत्री कमल पटेल (kamal patel) का कहना है कि कई जगह अवैध रेत खनन हो रहा है। रायसेन में ही ठेकेदार का 4 माह तक रिन्यू नहीं की गई है। जिसका फायदा सीहोर के ठेकेदारों ने उठाया है। ऐसे में ठेकेदारों से बकाया वसूली का काम भी होना चाहिए।

मामले में खनिज मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह (Brijendra Pratap Singh) ने कहा है कि कारोबारियों को छूट नहीं दी जा रही है। कुछ वक्त की राहत दी जा रही है। वही राहत देने के पीछे सरकार का कहना है कि कोरोना महामारी से आर्थिक व्यवस्था प्रभावित हुई है। जिसके कारण रेत कारोबारियों को राहत दी गई है।

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वहीं इस मामले में MSME मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा (Omprakash Saklecha) का कहना है कि राजस्थान से लगातार डंपर सामने आते हैं। जिसके भार 50 से 70 टन के होते हैं जिससे एक तो सड़के खराब होती है। वहीं ओवरलोडिंग (overloading) से कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जिस पर कंट्रोल होना आवश्यक है। वही PWD मंत्री गोपाल भार्गव (gopal bhargava) का कहना है कि छतरपुर सहित कई ऐसे ठेकेदार है। जिन्होंने एक किस्त जमा नहीं की है। करोड़ों रुपए बाकी है। सरकार को इस राशि को वसूलने का काम जारी रखना चाहिए।

बता दें कि मंगलवार को भी कैबिनेट बैठक में शिवराज सरकार द्वारा ठेकेदारों को राहत दी गई है। जहां मई से सितंबर तक की मासिक रॉयल्टी की राशि 50% देनी होगी। जबकि बाकी बची राशि 2022 में तीन किस्तों में ली जाएगी। इसके अलावा जिंदल समूह के ठेके 30 जून 2023 तक के हैं। उनका बकाया पैसा एक अप्रैल 2022 से तिमाही किस्त में 5 किस्तों में लिया जाएगा। वही ठेके में 10% की वृद्धि की गई है लेकिन यह वृद्धि दर उन्हें ठेका अवधि समाप्त होने के बाद ठेके अवधि को बढ़ाने में विधि के हिसाब से ली जाएगी।

वही मंत्रियों के लगातार हो रहे विरोध पर गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि कैबिनेट में हुए फैसले में ठेकेदारों को राहत देने का प्रस्ताव पारित किया गया। जिसमें बीच का रास्ता निकाला गया है। कोरोना की वजह से अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। बाजार में रेत की मांग घटी है। जिस पर उन्हें राहत देना अनिवार्य है।