MP News : शिवराज सरकार बदलने जा रही कमलनाथ सरकार का यह बड़ा फैसला, तैयारी पूरी

अब शिवराज सरकार एक बार फिर से कमलनाथ सरकार द्वारा तैयार की गई इस व्यवस्था को बदलने की तैयारी में है।

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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। लगभग 2 साल के सत्ता परिवर्तन के बाद आखिरकार मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार (shivraj government), कमलनाथ सरकार (kamalnath government) के एक फैसले को पलटने जा रही है। शिवराज सरकार के इस फैसले का फायदा प्रदेश के 97 हजार 165 आंगनबाड़ी केंद्रों (aanganwadi centers) को होगा। इसके साथ ही दिसंबर में इसका उत्पादन भी शुरू कर दिया जाएगा।

शिवराज सरकार कमलनाथ के फैसले को पलटते हुए प्रदेश के सातों पोषण आहार प्लांट महिला स्व सहायता समूह (self help group) को सौंपने का निर्णय लेगी इस संबंध में सरकार की तैयारी पूरी हो गई है। वहीं मार्च 2020 में मुख्यमंत्री बनने के बाद शिवराज सरकार को इस तैयारी में डेढ़ साल का वक्त लग चुका है। मंगलवार को कैबिनेट में सातों पोषण आहार प्लांट महिला स्व सहायता समूह को सौंपने का निर्णय लिया जा सकता है। इसके साथ ही दिसंबर से समूह के साथ तो सरकारी प्लांट में पोषण आहार का उत्पादन शुरू किया जा सकता है।

बता दें कि इससे पहले तत्कालीन कमलनाथ सरकार द्वारा सातों पोषण आहर प्लांट महिला स्व सहायता समूह से लेकर इसे एमपी एग्रो (MP Agro) को सौंप दिया गया था। जिसके बाद मार्च 2020 में सीएम शिवराज ने सातों प्लांट एमपी एग्रो से वापस लेकर स्व सहायता समूह के परिसंघों को सौंपने का निर्णय लिया था।

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बता दें कि प्रदेश में 97 हजार 135 आंगनबाड़ी केंद्र में 6 महीने से 3 साल के बच्चे सहित गर्भवती महिलाओं और किशोरों को टेक होम राशन (take home ration) दिया जाता है। वही 2018 तक यह कब्जा ठेकेदारों के पास था। वहीं 2017 में पोषण आहार सप्लाई कंपनी से विवाद होने के बाद राज्य सरकार ने फैसला बदलते हुए पोषण आहार उत्पादन का जिम्मा स्व सहायता समूह के परिसंघ को सौंपने का निर्णय लिया था।

वहीं वर्ष 2019 में मंडला सागर होशंगाबाद देवास धार में इन प्लांट को तैयार कर उत्पादन शुरू किया गया लेकिन 2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार द्वारा इस व्यवस्था से स्व सहायता समूह का नाम हटाकर इसे एमपी एग्रो को सौंप दिया गया था।

इससे पहले वर्ष 2017 में पोषण आहार सप्लायर कंपनियों से विवाद होने पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद स्व सहायता समूह से पोषण आहार का काम कराने का फैसला हुआ था। वहीं मार्च 2018 में शिवराज कैबिनेट की मंजूरी दी थी। वही कमलनाथ सरकार के विभाग द्वारा यह दलील दी गई कि स्व सहायता समूह द्वारा इसे आगे नहीं चलाया जा सकेगा। इसलिए इसे एमपी एग्रो को सौंपा जा रहा है। अब शिवराज सरकार एक बार फिर से कमलनाथ सरकार द्वारा तैयार की गई इस व्यवस्था को बदलने की तैयारी में है। जिसके लिए कैबिनेट में जल्द ही फैसला लिया जा सकता है।