MP : नर्सिंग कॉलेज खोलने नियम में बदलाव, चिकित्सा शिक्षा विभाग की बड़ी तैयारी, फर्जी कॉलेजों पर लगेगी रोक

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जांच हुई तो फर्जी नर्सिंग कॉलेज की हकीकत सामने आ गई। ऐसे में हाईकोर्ट के आदेश पर 70 नर्सिंग कॉलेज की मान्यता को रद्द कर दिया गया था।

कर्मचारियों

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश में प्राइवेट नर्सिंग कॉलेज (MP Private nursing colleges) के फर्जीवाड़े थमने का नाम नहीं ले रहे है। दरअसल कई नर्सिंग कॉलेज में बड़े पैमाने पर बड़ी गड़बड़ियां देखने के बाद मामला हाईकोर्ट (MP High court) पहुंच गया है। वहीं हाईकोर्ट की सख्ती के साथ ही अब निजी नर्सिंग कॉलेज पर बड़ी कार्रवाई करने के साथ राज्य शासन ने नियम में बदलाव की तैयारी की है।

नर्सिंग कॉलेज खोलने के नियम में बदलाव किए गए हैं। नर्सिंग कॉलेज खोलने के लिए 25 लाख रुपए की बैंक गारंटी देना अनिवार्य होगा। साथ ही 5 साल में खुद की बिल्डिंग ना बनाने पर बैंक गारंटी को राजसात किया जाएगा। जानकारी देते हुए मध्य प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग के उप सचिव केके दुबे ने कहा कि प्राइवेट नर्सिंग कॉलेज खोलने के लिए संस्था के बाद खुद की बिल्डिंग होनी चाहिए।

एकेडमिक बिल्डिंग ना होने पर ऑनलाइन आवेदन करते समय नर्सिंग कॉलेज खोलने वाली संस्था को 25 लाख़ की बैंक गारंटी देना अनिवार्य होगा। इसके लिए एफिडेविट देना होगा और इस संस्था को 5 साल के भीतर अपनी खुद की बिल्डिंग तैयार करनी होगी। वही 5 साल की बिल्डिंग न बनाने पर नर्सिंग कॉलेज के संचालक संस्था द्वारा जमा किए 25 लाख की बैंक गारंटी को जब्त कर लिया जाएगा।

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बता दें कि चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा नियम में बदलाव होने के बाद अब नर्सिंग कॉलेज के एकेडमिक बिल्डिंग लीज पर लेने के लिए समिति के 5 सदस्य और नर्सिंग कॉलेज के बीच 30 साल की लीज डीड होने पर ही उसे मान्यता दी जाएगी। वही नर्सिंग कॉलेज में संचालित सभी कोर्स के लिए पैरंट हॉस्पिटल में बिल्डिंग बिस्तर ज्यादा उपलब्ध होने पर दूसरे नर्सिंग कॉलेज को भी बाकी के आधार पर संबद्धता जी जाएगी।

वही नर्सिंग कॉलेज पर सख्ती शुरू की गई, नियम के तहत जिले में किसी भी समिति, ट्रस्ट, कंपनी द्वारा एक नर्सिंग कॉलेज संचालित की जा रही है तो उसी जिले में नया नर्सिंग कॉलेज संचालित नहीं होगा। जिले में पहले से चल रहे नर्सिंग कॉलेज के नाम या उससे मिलते जुलते नाम से नए नर्सिंग कॉलेज के लिए आवेदन को मान्य नहीं किया जाएगा।

बता दे कि Corona काल में जब संक्रमित की संख्या बढ़ने लगी तो अस्पताल में बिस्तर कम पड़ गए। इस मामले में नर्सिंग कॉलेज की संख्या के हिसाब से करीब एक लाख बिस्तर प्रदेश में होनी चाहिए थे। जनहित याचिका हाईकोर्ट पहुंची। जिसके बाद समिति बनाकर नर्सिंग कॉलेज की जांच के निर्देश दिए गए। नर्सिंग कॉलेज ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जांच हुई तो फर्जी नर्सिंग कॉलेज की हकीकत सामने आ गई। ऐसे में हाईकोर्ट के आदेश पर 70 नर्सिंग कॉलेज की मान्यता को रद्द कर दिया गया था।