transfer

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश (madhya pradesh) में 1 जुलाई से ट्रांसफर (transfer) पर लगी रोक हटा दी गई है। नई ट्रांसफर नीति (New transfer policy) के तहत प्रदेश में 1 जुलाई से 31 जुलाई के बीच अधिकारी कर्मचारियों के ट्रांसफर होने हैं। इसी बीच पटवारियों के ट्रांसफर को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। दरअसल मध्य प्रदेश में 9000 से अधिक पटवारियों (patwari) के तबादले अब नहीं हो सकेंगे। इसका बड़ा कारण ये है कि राजस्व विभाग में संविलियन नीति 2021 को लागू किया है।

इस नीति के लागू होने से पटवारियों को भी एक जिले से दूसरे जिले में पदस्थ किया जाएगा। वही 26 मार्च 2018 की पहली भर्ती हुए पटवारियों को ही संविलियन का मौका मिलेगा। इस प्रावधान के लागू होने के बाद प्रदेश के 9000 पटवारियों को बड़ा झटका लगा है। दरअसल प्रदेश में 9000 से अधिक पटवारी ऐसे हैं, जिनकी भर्ती 2018 के बाद हुई है। वहीं प्रदेश में पटवारियों के स्वीकृत पद 19,000 हैं। जिनमें से 17,500 पद भरे हुए हैं।

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संविलियन के लिए यह होंगे नियम

  • आरक्षण और जिला आरक्षण रोस्टर (District Reservation Roster) का पालन करते हुए पटवारियों का संविलियन होगा।
  • इसके अलावा संविलियन संबंधित जिले में रिक्त पद होने की सूरत में ही उस जिले में पटवारी का संविलियन किया जाएगा।
  • वरीयता की गणना जिले में प्रथम नियुक्ति तिथि से की जाएगी।
  • संविलियन आदेश जारी होने के 15 दिन के भीतर उपस्थिति दर्ज करानी अनिवार्य होंगे।
  • आवेदन ऑनलाइन होंगे।
  • पात्रता का आधार भी इसमें शामिल किया जाएगा।
  • वहीं अनारक्षित वर्ग के पटवारी का संविलियन अनारक्षित रिक्त पद पर ही किया जाएगा।
  • साथ ही एक बार संविलियन से जिला आवंटित होने के बाद पटवारियों को परिवर्तन की पात्रता नहीं दी जाएगी।
  • वहीं जिले में पदस्थापना कलेक्टर करेंगे।

किसे मिलेगी वरीयता

  • वहीं राजस्व विभाग की माने तो बरसों से दूसरे जिले में पदस्थ पटवारियों को प्राथमिकता के आधार पर पहले एक जिले से दूसरे जिले में पदस्थ किया जाएगा।
  • नई नीति में यह भी प्रावधान रखा गया है कि पटवारी की पत्नी या पति यदि शासकीय कर्मचारी है और दूसरे जिले में पदस्थ है तो एक ही जिले में पटवारी को भी पदस्थ किया जा सकता है।
  • इसके अलावा नई नीति के तहत विवाहित महिला, कल्याणी विधवा, तलाकशुदा और गंभीर बीमारी से ग्रसित पटवारी का संविलियन प्राथमिकता के आधार पर किया जा सकेगा।
  • इसके अलावा परिजन की करुणा से हुई मृत्यु की स्थिति में भी पटवारियों को संविलियन की पत्रता रहेगी।
  • हालांकि जिन पटवारियों के खिलाफ लोकायुक्त व आपराधिक प्रकरण चल रहे हो उनका संविलियन भी नहीं किया जा सकेगा।