गुंडागर्दी के चलते 100 साल पुराना राजपूत छात्रावास बंद, आरोपी 2 छात्रों पर इनाम घोषित

ग्वालियर।अतुल सक्सेना। बाल्मीकि समाज की शादी में घुसकर हंगामा, पथराव और मारपीट करने वाले राजपूत छात्रावास के छात्रों पर पुलिस ने समाज के विरोध के बाद मारपीट, लूट, डकैती, और छेड़छाड़ के मुकदमे दर्ज कर लिए हैं। इनमें दो नामजद आरोपियों पर पुकीस ने 5-5 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है। उधर देर रात छात्रावास प्रबंधन ने बैठक बुलाकर आगामी आदेश तक छात्रावास बंद करने के फैसला लिया है। गौरतलब है कि ये पहली बार है कि 100 साल पुराने छात्रावास को बंद करना पड़ा है।

दरअसल राजपूत छात्रावास से लगे मराठा बोर्डिंग में सोमवार की रात सीताराम खरे( बाल्मीकि) की बेटी की शादी थी। बारात दरवाजे पर आई इसी दौरान राजपूत छात्रावास के कुछ छात्रों का विवाद हो गया। थोड़ी देर में बहुत छात्र छात्रावास से आ गए और मारपीट शुरू कर दी। इन लोगों ने बारातियो के साथ सतह दूल्हे और उसके पिता को भी मारा पीटा। हंगामा करने के बाद ये लोग छात्रावास की छत पर चढ़ गए वहां से पथराव शुरू कर दिया जिसमें कई मेहमान चोटिल हो गए। वारदात के बाद शादी में शामिल लोगों ने विरोध जताया और वर वधु पक्ष ने चक्काजाम किया और पुलिस को बुला लिया। पुलिस ने आधी रात को ही छात्रावास में दबिश दी लेकिन हंगामा करने वाले भाग गए। मंगलवार को बाल्मीकि समाज ने विरोध किया, सफाई संरक्षकों ने काम नहीं किया और पुलिस पर लगातार आरोपियों पर एक्शन लेने के लिए दबाव बनाया जिसके बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया। पुलिस ने घटना में नामजद फरार दो छात्रों वीरेंद्र उर्फ वीरू तोमर और अर्जुन उर्फ अन्नू तोमर पर 5-5 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया है। वीरेंद्र के खिलाफ इंदारगंज थाने में ये एक साल में पांचवा मामला है जबकि अन्नू का रिकॉर्ड तलाशा जा रहा है। बताया जा रहा है कि उसकी भी हाल ही में मारपीट के एक मामले में जमानत हुई है।

प्रबंधन ने आपात बैठक बुलाकर लिया छात्रावास बंद करने का फैसला

सोमवार और मंगलवार के घटनाक्रम के बाद मंगलवार की रात राजपूत छात्रावास प्रवेश और अनुशासन समिति के पदाधिकारियों ने आपात बैठक कर छात्रावास को आगामी आदेश तक बंद करने का फैसला लिया। पदाधिकारियों का तर्क था कि पूरे घटनाक्रम से छात्रावास की छवि धूमिल हुई है । हालांकि घटना को पूर्व से निष्कासित छात्रों ने किया था लेकिन इन्हें यहाँ रह रहे वर्तमान छात्रों ने प्रश्रय दिया था इसलिए ये फैसला लिया गया है। छात्रावास में रह रहे छात्रों को तीन दिन में इसे खाली करने के आदेश दिये गए हैं।

पहली बार बंद किया गया 100 साल पुराना छात्रावास

100 साल पहले 1919 में बना राजपूत छात्रावास पहली बार बंद किया गया है। इससे पहले 2002 में यहाँ रह रहे छात्रों के उपद्रव के कारण ऐसे ही हालात बने थे लेकिन तब इसे बंद नहीं किया गया था बल्कि यहाँ रहने वाले 22 छात्रों को निष्कासित किया गया था। लेकिन इस बार बदनामी की वजह से छात्रावास प्रबंधन ने इसे बंद करने का फैसला लिया है और सभी 37 छात्रों को भी निष्कासित कर दिया है।