शिवराज सिंह चौहान

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। MP में वर्तमान में प्रदेश में कोरोना के एक्टिव प्रकरणों की संख्या 253 है। आज 15 जुलाई को 20 नये पॉजिटिव प्रकरण पाए गए हैं और 36 स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए, जिसके बाद पॉजीटिविटी दर 0.02 प्रतिशत हो गई है। इसी बीच सीएम शिवराज सिंह चौहान ने तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए सभी को अलर्ट रहने को कहा है।उन्होंने कहा कि कोरोना की संभावित तीसरी लहर के प्रति सरकार पूरी तरह से सजग और सतर्क है। कोरोना के प्रति लापरवाही बिल्कुल न बरतें, कोरोना अभी गया नहीं है।

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सीएम शिवराज सिंह ने कहा कि  कोरोना संक्रमण का प्रभाव काफी कम हो गया है। इसे दृष्टिगत रखते हुए अनेक क्षेत्रों में रियायत दी गई है, लेकिन हमें सावधानी बरतने के साथ कोविड अनुकूल व्यवहार को भी अपनाना होगा।आज 76 हजार 201 जाँचे की गई है। प्रदेश में 1687 फीवर क्लीनिक एक्टिव है। हेल्पलाईन नम्बर 104 तथा 181 पर 51 हजार 94 रोगियों का टेली कंसल्टेशन किया गया है। तीसरी लहर के पूर्व ही प्रदेश में तेजी से स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के साथ चिकित्सकीय अधोसंरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। विशेष रूप से अस्पतालों में आईसीयू बेडस की संख्या बढ़ाने के साथ ऑक्सीजन की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिये ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किये जा रहे हैं।

सीएम शिवराज सिंह कि प्रदेश में कोरोना की संभावित तीसरी लहर के लिए सभी आवश्यक तैयारियों में विस्तरों, दवाओं, ऑक्सीजन, सीटी स्केन, आईसीयू, पीआईसीयू, चिकित्सक, स्टाफ आदि की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। वर्तमान में मध्यप्रदेश में कोरोना के इलाज के लिए कुल 68 हजार से अधिक विस्तर चिन्हांकित हैं, जिनमें 54 हजार शासकीय तथा 13 हजार से अधिक निजी अस्पतालों में हैं। इनके अंतर्गत 4 हजार विस्तर प्रायवेट मेडिकल कॉलेजेस में चिन्हांकित हैं। आयुष्मान योजना अंतर्गत शासकीय एवं निजी चिकित्सालयों में कुल 31 हजार 11 विस्तर चिन्हांकित हैं।

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सीएम शिवराज सिंह ने कहा किप्रदेश में विशेषज्ञों की समिति द्वारा गहन अध्ययन के पश्चात शिशुओं के उपचार की विस्तृत प्रोटोकॉल गाइड लाइन जारी की गई है। अभिभावक बच्चों के साथ वार्ड में रह सकें, इसके लिए भी निर्देश जारी किए गए हैं।  मध्य प्रदेश के सभी जिलों में ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिये जो कार्य योजना बनाई गई थी उसके तहत अनेक जिलों में ऑक्सीजन प्लांटस शुरू हो चुके हैं। इस कार्य में शासन-प्रशासन के साथ राष्ट्रीय स्तर की कम्पनियों और प्रदेश के समाज सेवियों का बड़ा योगदान रहा है।  मध्यप्रदेश को ऑक्सीजन उत्पादन के मामले में आत्म-निर्भर बनाने की जो मुहिम शुरू हुई है, उसे निरंतर जारी रखा जाएगा। हमारी कोशिश यही होगी कि सभी अस्पतालों में मरीजों के उपचार के लिये ऑक्सीजन की उपलब्धता अस्पताल में ही सुनिश्चित हो।