इस कांग्रेस नेता का बड़ा बयान- BJP के विधायक संपर्क में, सिंधिया को बताया लैंड माफिया

सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि कमलनाथ (kamalnath) के बाद इतना पैसा है कि वह भाजपा विधायकों (BJP MLAs) को खरीद लें लेकिन कमलनाथ लोकतंत्र के रक्षक हैं।

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। अपनी बयान को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा (sajjan singh verma) ने एक बार फिर से विवादित बयान देकर सियासी हलचल बढ़ा दी है। दरअसल ज्योतिरादित्य सिंधिया (jyotiradita scindia) पर निशाना साधते हुए सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि प्रदेश में अगर सबसे बड़ा भू-माफिया (land mafia) कोई है तो वह ज्योतिरादित्य सिंधिया है।

इतना ही नहीं पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कुत्ते की समाधि तक को नहीं छोड़ा। वह भी उन्होंने अपने नाम करवा ली। इसके अलावा ट्रस्ट के हजारों एकड़ भूमि को अपने नाम करवाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया से बड़ा भू-माफिया कौन हो सकता है।

वही कांग्रेस के लोकतंत्र सम्मान दिवस पर बोलते हुए सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि लोकतंत्र के हत्यारे का टैग सिर्फ बीजेपी को मिलना चाहिए। BJP के 40 विधायक हमारे संपर्क में है लेकिन वह बिना पैसे पार्टी में कहां आने वाले हैं। इतना ही नहीं सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि कमलनाथ (kamalnath) के बाद इतना पैसा है कि वह भाजपा विधायकों (BJP MLAs) को खरीद लें लेकिन कमलनाथ लोकतंत्र के रक्षक हैं।

Read More: Accident: प्रतिबंध के बाद भी MP सीमा में घुसी महाराष्ट्र की बस, ट्रक से भिड़ंत में 8 यात्री घायल

इतना ही नहीं से पहले कमलनाथ ने भी बीजेपी सरकार और लंच पॉलिटिक्स पर निशाना साधते हुए कहा कि खरीद-फरोख्त की सरकार ज्यादा दिन तक सत्ता पर काबिज नहीं रह सकती। यह सरकार जल्द ही अपना कार्यकाल पूरा करेगी। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि कांग्रेस सत्ता में आई तो अधूरे वचन को पूरा किया जाएगा। 2023 के चुनाव तैयारियों पर बोलते हुए पीसीसी चीफ कमलनाथ ने कहा कि कांग्रेस पार्टी लगातार तैयारियां कर रही है। निश्चित 2023 में बदलाव होंगे।

खैर अब पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया पर बड़ा बयान देकर एक बार फिर से वाद-विवाद को छेड़ दिया है। इससे पहले लगातार दिग्विजय सिंह (digviajy singh) और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच शेर के बाद अब चूहे को लेकर प्रतिद्वंदता छिड़ी हुई है।