इंदौर में शुक्रवार को कमलनाथ देंगे BJP को बड़ा झटका

आकाश धौलपुरे/इंदौर। इंदौर के राजनीतिक बाजार में चर्चाएं गर्म है कि बीजेपी (bjp) नेता शंकर यादव शुक्रवार को राऊ में जीतू पटवारी (jitu patwari) के आयोजन में कमलनाथ (kamalnath) के समक्ष कांग्रेस (congress) का हाथ थाम सकते हैं। हालांकि बीजेपी (bjp) फिलहाल इस बात को लेकर कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दे रही है।

शंकर यादव बीजेपी (bjp) का कद्दावर चेहरा है जो आज भी विधानसभा चार में संकटमोचक के तौर पर जाना जाता है। एक वक्त था जब पूर्व मंत्री लक्ष्मण सिंह गौड़ और शंकर यादव ने इंदौर के विधानसभा चार में भारतीय जनता पार्टी की मजबूती के प्रयास एक साथ शुरू किए थे, लेकिन अब यह विधानसभा सीट भारतीय जनता पार्टी के किले में तब्दील हो गई है। हालाक ये है कि दो दशक से ज्यादा समय से यहां कांग्रेस (congress) को जीत हासिल नहीं हो पाई है। इसकी एक बड़ी वजह ये है कि इस सीट को लक्ष्मण सिंह गौड़ और शंकर यादव ने मिलकर अयोध्या में तब्दील कर दिया था, जिसके चलते  वोटों का ध्रुवीकरण कुछ ऐसा हुआ जो आज भी बीजेपी के खाते में रिकॉर्ड जीत दर्ज करा रही है।

दरअसल, इंदौर की विधानसभा 4 एक ऐसी सीट है जहां सिंधी, पंजाबी और हिंदू बहुल वोट संगठित तौर पर हैं। प्रदेश में चाहे किसी भी पार्टी की सरकार रही हो, लेकिन इंदौर के विधानसभा चार में कई दशकों से सिर्फ कमल का फूल ही खिलता आया है जिसके पीछे की वजह बहुत हद तक शंकर यादव को भी माना जाता है। हालांकि कुछ साल पहले शंकर यादव जब निगम सभापति थे उस दौरान उनके भाई और उन पर हत्या का मुकदमा कायम हुआ था। हाल ही में शंकर यादव को कोर्ट ने इस मामले में बरी किया है। शंकर यादव के बीजेपी को छोड़कर कांग्रेस में जाने के पीछे अलग-अलग कहानियां सामने आ रही है। बीजेपी से महापौर रही मालिनी गौड़ मानती है कि उनकी पारिवारिक समस्या के चलते वह कांग्रेस में जा रहे हैं । सूत्रों के मुताबिक पिछले दिनों मंत्री जीतू पटवारी से हुई मुलाकात के बाद शंकर यादव ने कांग्रेस में जाने का मन बना लिया था और चर्चा है कि कल राऊ में जीतू पटवारी के आयोजन के दौरान वह कमलनाथ के समक्ष कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता ले सकते हैं। हालांकि बीजेपी के पास शंकर की इस क्रिया की कोई प्रतिक्रिया नहीं है। लेकिन अगर शंकर यादव बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में  शामिल होते है तो बीजेपी का बड़ा जनाधार इंदौर की विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 4 में खो सकता है, क्योंकि इसकी नींव खड़ी करने वाले शंकर यादव एक दमदार नेता हैं।