BJP नेता की पीड़ा- निजी अस्पताल की इस लूट को किसकी छूट!

उनके पति और बीजेपी के ही वरिष्ठ नेता सुधीर जाचक इन दिनों लंग कैंसर से जूझ रहे हैं। टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल से उनका इलाज चल रहा है।

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। बीजेपी के वरिष्ठ नेता (MP BJP Leader) और भोपाल महिला मोर्चा की अध्यक्ष वंदना सुधीर जाचक ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी पीड़ा व्यक्त की है। उन्होंने फेसबुक पोस्ट (Facebook Post) में अपने कैंसर ग्रस्त पति के इलाज के लिए एक निजी अस्पताल पर सीधे-सीधे लूट करने का आरोप लगाया है।सहज, सरल और विनम्र स्वभाव के लिए जाने जाने वाली बीजेपी की वरिष्ठ नेता और महिला मोर्चा की अध्यक्ष वंदना सुधीर जाचक के लिए यह समय जिंदगी का सबसे पीड़ादायक समय है।

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दरअसल उनके पति और बीजेपी के ही वरिष्ठ नेता सुधीर जाचक इन दिनों लंग कैंसर से जूझ रहे हैं। टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल (Tata Memorial Hospital) से उनका इलाज चल रहा है। पूरा प्रोटोकॉल और दवाइयां मुंबई से ही आती है लेकिन कीमोथेरेपी कराने के लिए उन्हें किस तरह से एक निजी अस्पताल में लूटा गया, इसकी पीड़ा उन्होंने फेसबुक के माध्यम से बयां की है।

वंदना ने लिखा है कि भाजपा के जिला मंत्री  सुधीर जाचक लंग कैंसर से पीड़ित हैं। उनका इलाज टाटा हास्पिटल मुंबई से चल रहा है। पूरा प्रोटोकॉल और दवाईयां मुंबई से ही आती हैं, वहां पर हमारी असुविधा के कारण कीमो नहीं दिया जा सकता, इसलिये हम भोपाल में कीमो करवाने का सोचा, इसलिए हम अटल मेमोरियल कैंसर संस्थान जो 1100 क्वार्टर के हनुमान मंदिर के सामने स्थित है, वहां पर डाॅ एस. के. दुबे जी से मिलें। उन्होंने हमें सिटी स्कैन करवाने के लिये कहा। हमने उनके बताए हुए सान्या डायग्नोस्टिक सेंटर पर सिटी स्कैन करवाया । दिनांक 27 दिसम्बर को कीमो की तारीख तय की गई, आज जब हम वहां पहुंचे तो इन्होंने पहले 5000 रु जमा करवाए।

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वंदना ने आगे लिखा है कि फिर जो इन्हें पहले से पता था कि हमारे पास कीमो की 3 साइकल की दवाईयां हैं, तो डॉ एस. के. दुबे जी ने हमसे मुंबई से लाई हुई दवाइयों की MRP पर 20% पैसे जमा करने का बोला। 20% पैसे जमा करवाने की बात पहले नहीं की गई, जब इन्हें लगा कि अब मरीज हमारे चंगुल में फंस गया है, तब इन्होंनें ये शर्त रखी।  इस समय सुधीर जाचक जी की स्थिति बिल्कुल भी ठीक नहीं थी, उन्हें बहत दर्द था। पर इन लालची लोगों ने एक न सुनी और हमें वहां से यह कह कर जाने को कहा।  आपके जो 5000 रु जमा हैं, वो सेटलमेंट के बाद मिलेंगें पर हमने कहा कि वो अमाउंट हमें अभी चाहिए तब कहीं 1 घंटे की झिकझिक के बाद वो पैसे वापस दिए।

अगर इस हॉस्पिटल का ये रवैया हमारे साथ है तो जो और पेशेंट आते होंगें उनके साथ क्या होता होगा। ऐसे लालची और लोभी लोंगों को हास्पिटल खोलने की अनुमति कैसे मिलती है? और इस मामले के बाद अगर हमारे पेशेंट की तबियत बिगड़ती है तो या उन्हें कुछ भी होता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी हास्पिटल प्रबंधन और #डॉएसके_दुबे की होगी।” वंदना सत्ताधारी बीजेपी की नेता है और भोपाल में जाचक दंपत्ति जाना माना नाम है जिन्होंने अपने व्यवहार की दम पर राजनीति में अच्छा खासा मुकाम पाया है। अब यदि वही अस्पताल के इस रवैये के शिकार हैं तो समझा जा सकता है कि आम आदमी की बिसात ही क्या…

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