कमलनाथ ने शिवराज से पूछे 15 सवाल, कोरोना से हुई मौतों के आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग

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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। पूर्व मुख्यमंत्री, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ (Kamalnath) ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chouhan) से 15 सवाल पूछे हैं। इन सवालों के माध्यम से कमलनाथ ने मध्य प्रदेश में कोरोना से हुई मौतों को लेकर बताये गए सरकारी आंकड़ो पर सवाल खड़े किए हैं। साथ ही उन्होंने कोरोना से हुई मौतो की संख्या सार्वजनिक करने की मांग की है।

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कमलनाथ में शिवराज पर तंज कसते हुए कहा है कि कोरोना से निपटने के ठोस उपाय करने के बजाए शिवराज ने कभी स्वास्थ्य आग्रह किया तो कभी ‘मेरा मास्क-मेरी सुरक्षा’ जैसे अभियान चलाये। कभी शारीरिक दूरी के गोले बनाते रहे तो कभी रथ पर सवार होकर बीच बाजार में निकलते रहे। लेकिन प्रदेश भर में ऑक्सीजन और इंजेक्शन की कमी से हुई मौतों को नहीं देखा। कमलनाथ का कहना है कि खुद प्रदेश की जनता ने देखा है कि किस कदर लोग न केवल अस्पताल में बेड के लिए भटकते रहे बल्कि ऑक्सीजन और इंजेक्शन के अभाव में दम तोड़ते रहे। सरकार ने न इलाज का इंतजाम किया, ना डॉक्टर व मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति की। दूसरी लहर को लेकर कोई ठोस तैयारी सरकार के द्वारा नहीं की गई। कमलनाथ में सवाल उठाते हुए कहा है कि आखिरकार किस आधार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की पीठ कोरोना से निपटने के किन प्रयासो पर थपथपा रहे है। कमलनाथ ने शिवराज से निम्नलिखित सवाल पूछे हैं-

शिवराज सरकार स्पष्ट करें कि उन्होंने किस आधार पर सामान्य व अन्य बीमारियों और कोविड से हुई मृत्यु का अलग-अलग आंकलन किया है?
जिन लोगों की सामान्य मृत्यु बताई जा रही है, उसका आधार क्या है? क्या इसको लेकर उनके परिवार से कोई जानकारी ली गई या सम्पर्क किया गया है क्या?
प्रदेश सरकार ने प्रदेश के समस्त सरकारी और निजी अस्पतालों से कोविड और नॉन कोविड से हुई मृत्यु के अलग-अलग आंकड़े लिए है क्या?
मध्यप्रदेश में पिछले 3 माह में मृत्यु दर क्या रही और उसमें कितने प्रतिशत की वृद्धि हुई है?
प्रदेश में पिछले 3 माह में कुल कितने लोगों की मृत्यु हुई है?
क्या सरकार के पास शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में मृत्यु के अलग-अलग आंकड़े उपलब्ध है?
ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमण से लोगों की मौत हो रही है, इसके आंकलन की कोई व्यवस्था की गई है क्या?
ग्रामीण क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग जागरूकता के अभाव में, इलाज व टेस्टिंग के अभाव में कोरोना को अन्य बीमारी समझ घर पर ही इलाज कर रहे हैं। इसमें से कई लोगों की रोज़ मृत्यु हो रही है। उन आंकड़ों को कोरोना से मृत्यु के आंकड़ों में शामिल किया गया है क्या?
कोविड संक्रमित मृत व्यक्ति, जिसकी सूचना किसी भी स्तर पर सरकार और प्रशासन को नहीं मिली, उनके आंकड़ों को शामिल करने की कोई व्यवस्था की गयी है क्या?
पिछले 3 माह में सरकार ने प्रदेश में हुई मौतों को लेकर घर-घर, गांव-गांव या मोहल्ला स्तर पर कोई जानकारी एकत्रित की है या इसको लेकर कोई अभियान चलाया है क्या?
क्या प्रदेश के नगर निगम, नगर पालिका, नगर परिषद और ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों ने पिछले 3 माह में प्रत्येक मृत व्यक्ति के निकट संबंधी को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया है और इसकी संख्या व वास्तविक आँकड़ा क्या है?
क्या सरकार ने ऐसा कोई अभियान चलाया है कि प्रदेश में जिन परिवारों में भी कोरोना संक्रमण से मृत्यु हुई है, वह निकट के नगर निगम,नगर पालिका,पंचायतों व परिषद में इसकी जानकारी दर्ज करा सके?
मुक्तिधामों से मृत्यु की इंट्री वाले रजिस्टर क्यों हटा लिये गये हैं?
सरकार द्वारा जारी मृत्यु के आंकड़ों और कोविड प्रोटोकॉल से अंतिम संस्कार के आंकड़ों में जमीन आसमान सा अंतर क्यों है?
सरकार शमशान और कब्रिस्तानों में कोविड प्रोटोकॉल से हुए अंतिम संस्कारों के आंकड़े को कोविड मृत्यु के आंकड़े क्यों नही मान रही है?
कमलनाथ का कहना है कि उम्मीद है कि सरकार प्रदेश के हित में इन सवालों का जल्द जवाब देगी।