MP Weather : मप्र में फिर करवट लेगा मौसम, इन जिलों में बारिश की संभावना

वही गरज चमक के साथ बारिश का सिलसिला 19 फरवरी तक चलने के आसार हैं। इसका सबसे ज्यादा असर भोपाल, ग्वालियर, सागर, जबलपुर और चंबल संभाग में पड़ सकता है।

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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश में इन दिनों मौसम (MP Weather) के मिजाज बदले बदले है, तापमान (Temperature) में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग (Weather Department) की माने तो आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश में एक बार फिर बारिश (Rain) का दौर शुरु हो सकता है। Valentine’s Day यानि 14 फरवरी को बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) से कुछ नमी आने की संभावना है, ऐसे में 16 से 19 फरवरी के बीच बारिश की संभावना बन रही है।

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मौसम विभाग के अनुसार पूर्वी मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ के ऊपर एक चक्रवाती (Cyclone) हवाओं का क्षेत्र विकसित हो सकता है। 15 फरवरी से मप्र में एक पूर्वी हवाओं का ट्रफ बनने जा रहा है, इससे बंगाल की खाड़ी में नमी आने के चलते बादल छाने लगेंगे और राजधानी सहित प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी इलाके में बरसात भी हो सकती है। इसके चलते 16 फरवरी से प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्र में बादल छाने के साथ ही बरसात होने की संभावना है।

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वही गरज चमक के साथ बारिश का सिलसिला 19 फरवरी तक चलने के आसार हैं। इसका सबसे ज्यादा असर भोपाल, ग्वालियर, सागर, जबलपुर और चंबल संभाग में पड़ सकता है। कहीं-कहीं तेज बारिश (Rain) भी हो सकती है। इसके बाद तापमान में हल्की गिरावट भी दर्ज की जाएगी। पिछले चौबीस घंटे में प्रदेश में सबसे कम तापमान पचमढ़ी में 9 डिग्री सेल्सियस रायसेन, मंडला, उमरिया एवं रीवा में दर्ज किया गया। गुरुवार को राजधानी का अधिकतम तापमान 29.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। यह सामान्य से दो डिग्री सेल्सियस अधिक रहा।

अन्य राज्यों का हाल

भारतीय मौसम विभाग IMD के अनुसार मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु में 16 से 20 फरवरी के बीच वर्षा होने या गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। वही स्काइमेट के मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पूर्वी मध्य प्रदेश और इससे सटे छत्तीसगढ़ तथा विदर्भ के ऊपर एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र विकसित हो सकता है और इस सिस्टम से तेलंगाना होते हुए दक्षिणी तमिलनाडु तक एक ट्रफ विकसित हो सकती है। इन दोनों मौसमी सिस्टमों के चलते भारत के दोनों समुद्री किनारों अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आर्द्रता देश के जमीनी भागों के ऊपर पहुँचेगी जिससे मौसम बिगड़ेगा और बारिश देखने को मिलेगी।

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