Employment : 7 लाख युवाओं को रोजगार देने का प्लान तैयार, CM ने दिए यह निर्देश

मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वनावरण में वृद्धि के साथ ही वन आधारित गतिविधियों तथा वनोपजों के संग्रहण और विक्रय में रोजगार के अवसर बढ़ाये जाये।

रोजगार

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। नगरीय निकाय चुनाव (Urban body elections) और पंचायत चुनाव  से पहले शिवराज सरकार (Shivraj Government) का रोजगार (Employment) और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश (Aatmanirbhar Madhya Pradesh) पर विशेष फोकस है। हर विभाग में युवाओं के रोजगार के अवसर तलाशे जा रहे है। अब मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान (Chief Minister Shivraj Singh Chauhan)  ने वन आधारित गतिविधियों एवं वनोपजों के विक्रय में रोजगार बढ़ाने के निर्देश दिए है।

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दरअसल, वन विभाग (Forest department) के कार्यों की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वनावरण में वृद्धि के साथ ही वन आधारित गतिविधियों तथा वनोपजों के संग्रहण और विक्रय में रोजगार के अवसर बढ़ाये जाये। 7 लाख 68 हजार व्यक्तियों को 100 दिवस रोजगार देने का एक्शन प्लान तैयार हो गया है, जो एक अप्रैल 2021 से क्रियान्वित होगा। इसके साथ ही 317 ग्राम वन समितियों की सूक्ष्म प्रबंध योजना तैयार की गयी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वनावरण बढ़ाने वाली वन समितियों को प्रोत्साहित और पुरस्कृत किया जायेगा। वन समितियों को सशक्त बनाया जायेगा।  स्वयं वन क्षेत्र विस्तार में बेहतर कार्य करने वाली वन समितियों के द्वारा लगाये गये वनों का अवलोकन करेंगे।प्रदेश में 32 लघु वनोपजों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price) घोषित कर दिया गया है। समर्थन मूल्य (MSP) की जानकारी ग्रामीणों को दी जा रही है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि वीर गति प्राप्त वनकर्मियों के आश्रितों की अनुग्रह अनुदान राशि 10 लाख रूपये से बढ़ाकर 20 लाख रूपये की जायेगी।लघु वनोपज का संवहनीय प्रबंधन के अंतर्गत विभागीय वृक्षारोपण में लघु वनोपज प्रजातियों के रोपण को 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत किया जायेगा। 86 वन-धन केन्द्रों के माध्यम से लघु वनोपज के मूल्य संवर्धन एवं विपणन से 25 हजार हितग्राहियों को वर्ष भर रोजगार देने का लक्ष्य है। बाँस की गुणवत्ता मूल्य संवर्द्धन के लिये 20 बाँस क्लस्टरों का व्यवस्थित विकास किया जायेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘बफर में सफर’ के अंतर्गत बफर जोन में दिन एवं रात्रि सफारी, हॉट एयर बैलून तथा मचान गतिविधियों को शुरू किया गया है। संजय एवं सतपुड़ा बाघ परियोजनाओं (Sanjay and Satpura tiger projects) के विकसित रहवास में बाघों का पुनर्स्थापन किया जायेगा। इसी तरह गांधी सागर (Gandhi Sagar) और नौरादेही में बाघ पुनर्स्थापना के लिए गांधी सागर में 56 चीतल और नौरादेही में 318 चीतल पुनर्स्थापित किये गये हैं।

1300 व्यक्तियों को रोजगार देने का दीर्घ-कालीन लक्ष्य 

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाघ (Tiger)प्रदेश के बाद देश के 26 प्रतिशत तेन्दुओं की संख्या के साथ मध्यप्रदेश तेन्दुआ (Leopard) प्रदेश भी बन गया है। भारत में तेन्दुओं की संख्या 12 हजार 852 है, जबकि मध्यप्रदेश में तेन्दुओं की संख्या 3 हजार 721 है। ईको पर्यटन के लिये 129 स्थल चयनित किये गये है। ईको पर्यटन (Eco Tourism) गतिविधियों के संचालन में वन समितियों को प्राथमिकता दी जा रही है। अभी तक 350 व्यक्तियों को ईको पर्यटन में रोजगार मिला है। दीर्घ-कालीन लक्ष्य 1300 व्यक्तियों को रोजगार देने का है।

गौरतलब है कि इस बार प्रदेश में अति सघन वन क्षेत्र में 2437 वर्ग किलोमीटर अर्थात 2 लाख 43 हजार 700 हेक्टेयर की वृद्धि हुई है।  यह प्रदेश के लिये बड़ी उपलब्धि है। भारतीय वन सर्वेक्षण 2019 की रिर्पाट में यह तथ्य प्रदर्शित किए गए हैं। भारतीय वन सर्वेक्षण के अनुसार वर्ष 2005 में प्रदेश में अति सघन वन क्षेत्र 4239 वर्ग किलोमीटर था, जो 2019 में बढ़ कर 6676 वर्ग किलोमीटर अर्थात 6 लाख 67 हजार 600 हेक्टेयर हो गया है।

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