सिंधिया के प्रदेश अध्यक्ष बनने की राह में फंसा पेंच, हो सकतें है रेस से बाहर!

भोपाल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद ज्योतिदात्यि सिंधिया की राह में अब पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और हाल ही में झाबुआ से विधायक निर्वाचित हुए कांतिलाल भूरिया का नया पेंच आ गया है। दरअसल प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में अब तक ज्योतिरादित्य सिंधिया बढ़त बनाए हुए हैं। लेकिन कांग्रेस की राजनीति में सब आसान नहीं होता। लिहाजा अब तक प्रदेश अध्यक्ष के नाम का ऐलान नहीं हो पाया है। इस बीच इस मामले में नया मोड़ तब आ गया, जब लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कांतिलाल भूरिया को प्रदेश अध्यक्ष के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार करार दे दिया। इससे आने वाले दिनों में प्रदेश अध्यक्ष के लिए विवाद थमने के आसार कम ही हैं।

सज्जन सिंह वर्मा ने इंदौर में गोवर्धन पूजा के एक स्थानीय कार्यक्रम में कांतिलाल भूरिया की पैरवी करते हुए कह दिया कि कांतिलाल भूरिया पहले भी प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। उनमें सबको साथ लेकर चलने की काबिलियत है। उनका इतना कहना था कि प्रदेश में कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर चल रही गहमागहमी के बीच एक नया विवाद पैदा हो गया। अब उनके बयान के मायने निकाले जा रहे हैं और इसे एक तरह से ज्योतिरादित्य सिंधिया की दावेदारी कम करने का पैंतरा माना जा रहा है। उनके इस बयान ने अप्रत्यक्ष रूप से सिंधिया के नेतृत्व क्षमता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या सिंधिया सबको साथ लेकर चलने में सक्षम नहीं हैं और सबको साथ लेकर चलने के मामले में कांतिलाल भूरिया ज्यादा बेहतर हैं। 

यहां बता दें कि पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया हाल ही में झाबुआ विधानसभा उप चुनाव में 27,804 वोटों के भारी अंतर से चुनाव जीते हैं। ऐसे में उनका प्रदेश में कांग्रेस की राजनीति में कद और बढ़ गया है। वे पिछले लोकसभा चुनाव में झाबुआ संसदीय क्षेत्र से चुनाव हार गए थे। लेकिन अब उन्होंने उप चुनाव जीतकर पुराना रूतबा फिर हासिल कर लिया है। इधर, मंत्री सज्जन सिंह वर्मा को मुख्यमंत्री कमलनाथ का समर्थक माना जाता है। वहीं, कांतिलाल भूरिया के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का करीबी माना जाता है। झाबुआ उप चुनाव के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने चुनावी रणनीति तैयार करने में बड़ी भूमिका निभाई थी। उन्होंने यहां कांतिलाल के पक्ष में इमोशनल कार्ड खेला था, उन्होंने इस उप चुनाव को भूरिया का आखिरी चुनाव करार देकर उन्हें जीताने की अपील की थी, जिसका असर चुनाव परिणाम पर भी दिखा। इस तरह कांग्रेस की राजनीति में देखें तो कांतिलाल को कमलनाथ कैंप और दिग्विजय सिंह दोनों ही कैंप का समर्थन हासिल हो सकता है। ऐसे में ज्योतिरादित्य सिंधिया की राह प्रदेश अध्यक्ष के लिए मुश्किल हो सकती है। वैसे ही सिंधिया ने कई बार सरकार के कामकाज पर सवाल उठाकर अप्रत्यक्ष रूप से प्रेशर पॉलिटिक्स भी कर चुके हैं। वहीं सिंधिया समर्थक मंत्री खुलकर सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के लिए लॉबिंग कर रहे हैं। एेसे में प्रदेश अध्यक्ष का चयन और मुश्किल काम बन गया है।

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