नागरिकता संशोधन बिल पर सिंधिया का रुख चर्चा में

भोपाल| नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 को लेकर राज्यसभा में बहस चल रही है| वहीं देश भर में इसको लेकर भी बहस छिड़ी हुई है, कई जगह इसके विरोध में प्रदर्शन भी हो रहा है| इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का इस बिल को लेकर रुख चर्चा का विषय बन गया है| इंदौर में सिंधिया ने कहा ‘यह बिल संविधान के विपरीत होना अलग बात है, लेकिन यह भारत की सभ्यता और वसुधैव कुटुंबकम् की विचारधारा के अनुरूप है’। हालांकि, बाद में उन्होंने ट्वीट करके सफाई दी कि यह ‘संविधान की मूल भावना के खिलाफ है और भारतीय संस्कृति के विपरीत भी है’।  

दरअसल, बुधवार को सिंधिया इंदौर पहुंचे, जहां मीडिया से चर्चा में उन्होंने नागरिकता संशोधन बिल को लेकर कहा यह भारत की सभ्यता और वसुधैव कुटुंबकम् की विचारधार के अनुरूप है। लेकिन उन्होंने इसे संविधान के विपरीत होना भी बताया। कांग्रेस ही नहीं बहुत सारी पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं। देश के अनेक राज्यों में आप स्थिति देख सकते हैं। हमारे संविधान के निर्माता बाबा साहब अंबेडकर ने संविधान लिखने के समय किसी को जात-पात के दृष्टिकोण से नहीं देखा था। पिछले तीन चार हजार सालों से इस भारत माता की माटी ने सभी को अपनाया है। वासुदेव कुटुंबकम ही भारत की विशेषता रही है।

पहले भी पार्टी लाइन छोड़ कर चुके हैं समर्थन 

सिंधिया पहले भी जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म करने के मोदी सरकार के फैसले का समर्थन कर चुके हैं। हालांकि, कांग्रेस शुरू से अब तक सरकार के इस कदम का विरोध कर रही है। नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर भी कांग्रेस विरोध कर रही है| इस बीच सिंधिया का बयान चर्चा में आ गया | हालाँकि उन्होंने ट्वीट कर इसे बाद में संविधान की मूल भावना के खिलाफ है और भारतीय संस्कृति के विपरीत बताया| 

बाद में ट्वीट कर दी सफाई 

सिंधिया ने ट्वीट कर लिखा ‘नागरिकता संशोधन विधेयक 2019  संविधान की मूल भावना के ख़िलाफ़ है,भारतीय संस्कृति के विपरीत भी है। अंबेडकर जी ने संविधान लिखते समय किसी को धर्म, जात के दृष्टिकोण से नहीं देखा था।भारत का इतिहास रहा है कि हमने सभी को अपनाया है- वासुदेव कुटुंबकम भारत की विशेषता है।धर्म के आधार पर पहले कभी ऐसा नहीं हुआ’।

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