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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के किसानों (Farmers) के लिए जरुरी खबर है। रबी विपणन वर्ष 2021-22 में समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूँ उपार्जन के लिये रजिस्ट्रेशन (Registration) की आखरी तारीख 25 फरवरी रखी गई है। इसके बाद किसान पंजीयन नहीं करा सकेंगे। खास बात ये है कि  अब तक 21 लाख 6 हजार किसानों ने ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन कराया गया है जो कि विगत वर्ष की तुलना में एक लाख 59 हजार अधिक है। बता दें कि किसान पंजीयन का कार्य प्रदेश के 3518 केन्द्रों पर किया जा रहा है।

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दरअसल, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री बिसाहूलाल सिंह (Food Minister Bisahulal Singh) और सहकारिता मंत्री अरविन्द भदौरिया (Cooperative Minister Arvind Bhadoria) ने बताया कि रबी विपणन वर्ष 2021-22 में समर्थन मूल्य  (Minimum Support Price)  पर गेहूँ बेचने के लिये 21 लाख 6 हजार किसानों ने ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन कराया गया है जो कि विगत वर्ष की तुलना में एक लाख 59 हजार अधिक है।

मंत्री बिसाहूलाल सिंह ने बताया कि इस वर्ष 125 लाख मेट्रिक टन गेहूँ(wheat), 20 लाख मेट्रिक टन दलहन और तिलहन के भंडारण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उपार्जन अनुमान के अनुसार अधिकारियों को अनाज के भंडारण, परिवहन, बारदाना और वित्तीय व्यवस्था की तैयारी विभाग द्वारा की जा रही है। उन्होंने बताया कि दलहन एवं तिलहन का उपार्जन प्राथमिकता से गोदाम स्तरीय केन्द्रों पर किया जाएगा, जिससे स्कन्ध का शीघ्रता से परिवहन एवं भंडारण(Transport and Storage) कराया जा सके।

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वही सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद भदौरिया ने कहा कि पंजीकृत किसानों से 15 मई तक उपार्जन पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि उपार्जित अनाज को यथासंभव शीघ्र भंडारण कराया जाए साथ ही केन्द्रों पर अनाज की सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था हो, जिससे अनाज का एक भी दाना बर्बाद न हो। अनाज को पक्के चबूतरे पर ही रखा जाए ताकि अचानक होने वाली बूंदा-बांदी से भी अनाज सुरक्षित रह सके।मंत्री डॉ. भदौरिया ने निर्देश दिए कि उपार्जन केन्द्रों की संख्या पूर्ववत रहेगी। उपार्जन केन्द्रों की संख्या में कमी नहीं की जाएगी। समिति को किसी कारणवश बंद करना पड़ा तो उसकी जगह एसएचजी, एफपीयू, एफपीसी द्वारा गेहूँ उपार्जन कराया जाएगा।

बारिश और ओलावृष्टि से सावधान

अचानक होने वाली बारिश (Rain) के समय अनाज को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त आकार एवं संख्या में तिरपाल की व्यवस्था की जाए। कुछ समय के लिए अचानक तत्काल भंडारण की आवश्यकता हो तो निकट की खाली पड़ी शासकीय संस्थाओं में कुछ समय के लिए अनाज का भंडारण किया जा सकता है। अनाज के उपार्जन, ट्रांसपोर्टेशन ( transportation) तथा भंडारण ही सतत निगरानी की जाए। गेहूँ एवं चना का भंडारण पृथक-पृथक करने के निर्देश दिए गए, जिससे दोनों ही अनाज को सुरक्षित रखा जा सके। अधिकारियों ने जानकारी दी कि विगत वर्ष की तुलना में गेहूँ का रकबा 4 प्रतिशत कम हुआ है।