Social Anxiety: क्या आपको भी चार लोगों से मिलने और बात करने से लगता है डर? कहीं आप सोशल एंजायटी के शिकार तो नहीं

Social Anxiety: नए लोगों से मिलने-जुलने में डर लगना, जिसे "सोशल एंग्जाइटी" या "सामाजिक चिंता" भी कहा जाता है, एक आम समस्या है। यह थोड़ी शर्मिंदगी से लेकर गंभीर चिंता तक हो सकती है जो दैनिक जीवन में बाधा डाल सकती है।

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Social Anxiety: आजकल की व्यस्त जिंदगी में चिंता और तनाव आम बात है। लेकिन जब यह चिंता हद से ज्यादा बढ़ जाती है और दैनिक जीवन में बाधा डालने लगती है, तो यह एंग्जाइटी का रूप ले सकती है। एंग्जाइटी एक मानसिक बीमारी है जो अत्यधिक चिंता, घबराहट, और डर की भावनाओं से कैरेक्टराइज़्ड होती है। वहीं, सोशल एंग्जाइटी, एंग्जाइटी का ही एक प्रकार है, जो सामाजिक स्थितियों से जुड़े डर और चिंता से उत्पन्न होती है। सोशल एंग्जाइटी वाले लोग दूसरों द्वारा आंके जाने या शर्मिंदा होने के डर से ग्रस्त होते हैं, जिसके कारण वे सामाजिक समारोहों, पार्टियों, या यहां तक कि काम पर जाने से भी बच सकते हैं।

क्या होती है सोशल एंग्जाइटी

आजकल के भागदौड़ भरे जीवन में कई लोग सामाजिक डर (Social Anxiety) नामक मानसिक विकार से जूझ रहे हैं। यह डर न केवल सामाजिक जीवन को प्रभावित करता है, बल्कि व्यक्ति के आत्मविश्वास और आत्मसम्मान को भी कमजोर कर सकता है। सामाजिक डर वाले लोग नई जगहों पर जाने, नए लोगों से मिलने, या सामाजिक समारोहों में भाग लेने से डरते हैं। उन्हें चिंता होती है कि वे दूसरों द्वारा आंके जाएंगे या उनका मजाक उड़ाया जाएगा। इस डर के कारण, वे अक्सर सामाजिक गतिविधियों से बचते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उनका सामाजिक जीवन सीमित हो जाता है। वे दोस्त बनाने और रिश्ते बनाने में भी कठिनाई महसूस कर सकते हैं।

सोशल एंजाइटी के क्या-क्या लक्षण होते हैं

सोशल एंजाइटी के कई लक्षण होते हैं जैसे आत्मविश्वास में कमी, मजाक बनने का डर लगा रहना, खुद को दूसरों से हमेशा कम समझना, किसी से बात करते वक्त पसीना आना या फिर हकलाना, दूसरों के द्वारा हमेशा जज किए जाने का डर लगना, ग्रुप में रहकर भी सभी से अलग रहना।

सोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर (एसएडी) एक आम मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है जिसका प्रभावी ढंग से इलाज किया जा सकता है।

उपचार में आमतौर पर निम्नलिखित शामिल होते हैं:

1.सीबीटी: यह सबसे प्रभावी उपचारों में से एक है, जो लोगों को उनकी चिंतापूर्ण सोच और व्यवहार की पहचान करने और उन्हें चुनौती देने में मदद करता है।

2. दवाएं: चिंता और अवसाद के लिए दवाएं लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती हैं।

3. जीवनशैली में बदलाव: नियमित व्यायाम, स्वस्थ आहार और पर्याप्त नींद लेने से लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है।

4. सहायता समूह: एसएडी से जूझ रहे अन्य लोगों के साथ जुड़ने से समर्थन और प्रोत्साहन मिल सकता है।

डिस्क्लेमर – इस लेख में दी गई सूचनाएं सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। एमपी ब्रेकिंग इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह लें।


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भावना चौबे

भावना चौबे

इस रंगीन दुनिया में खबरों का अपना अलग ही रंग होता है। यह रंग इतना चमकदार होता है कि सभी की आंखें खोल देता है। यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि कलम में बहुत ताकत होती है। इसी ताकत को बरकरार रखने के लिए मैं हर रोज पत्रकारिता के नए-नए पहलुओं को समझती और सीखती हूं। मैंने श्री वैष्णव इंस्टिट्यूट ऑफ़ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन इंदौर से बीए स्नातक किया है। अपनी रुचि को आगे बढ़ाते हुए, मैं अब DAVV यूनिवर्सिटी में इसी विषय में स्नातकोत्तर कर रही हूं। पत्रकारिता का यह सफर अभी शुरू हुआ है, लेकिन मैं इसमें आगे बढ़ने के लिए उत्सुक हूं।मुझे कंटेंट राइटिंग, कॉपी राइटिंग और वॉइस ओवर का अच्छा ज्ञान है। मुझे मनोरंजन, जीवनशैली और धर्म जैसे विषयों पर लिखना अच्छा लगता है। मेरा मानना है कि पत्रकारिता समाज का दर्पण है। यह समाज को सच दिखाने और लोगों को जागरूक करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। मैं अपनी लेखनी के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करूंगी।