Parenting Tips: क्या बच्चा सिख गया है गाली देना? अपनाएं ये 4 तरीके और बदलें उसकी आदत

Parenting Tips: क्या आपका बच्चा भी गाली देने लगा है? चिंता न करें, आप अकेले नहीं हैं। यह एक आम समस्या है जिसका सामना कई माता-पिता करते हैं। लेकिन घबराने की बजाय, आप इन 5 आसान तरीकों को अपनाकर बच्चे की इस आदत को बदल सकते हैं।

भावना चौबे
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Parenting Tips: बच्चों की परवरिश में उनके आसपास का माहौल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि वे सकारात्मक और प्रेमपूर्ण वातावरण में पलते हैं, तो वे संस्कारी और विनम्र बनते हैं। लेकिन, यदि घर का माहौल नकारात्मक या अशांत है, तो बच्चे गलत चीजें सीखने की अधिक संभावना रखते हैं। इसमें गाली देना भी शामिल है। ऐसे माहौल में बच्चे जिद्दी हो सकते हैं और किसी के भी सामने गाली-गलौज करने लगते हैं, जिससे उनका व्यक्तित्व नकारात्मक रूप से प्रभावित होता है। यदि आपका बच्चा भी गाली देना सीख गया है, तो निराश न हों। आप कुछ आसान उपायों द्वारा उन्हें सुधारने में मदद कर सकते हैं।

आसपास का माहौल रखें सकारात्मक

बच्चा जब आपके सामने गाली देता है, तो यह निश्चित रूप से एक मुश्किल स्थिति होती है। ऐसे में गुस्सा आना या आपा खोना स्वाभाविक है, लेकिन धैर्य रखना और समझदारी से काम लेना ज़रूरी है। बच्चे सीखने की मशीन होते हैं। वे अपने आसपास के लोगों, खासकर परिवार के सदस्यों, को देखकर और सुनकर सीखते हैं।
यदि आप उनके सामने अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं, तो वे इसे अपनाने की संभावना रखते हैं।

सही गलत समझाएं

यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि बच्चों को अभी तक सही और गलत की पूरी जानकारी नहीं होती है। उन्हें जो चीज नई लगती है, वे उसे दोहराने लगते हैं। यदि आप उनके सामने गाली देते हैं, तो वे यह नहीं समझ पाएंगे कि यह गलत है। वे सोच सकते हैं कि यह सामान्य व्यवहार है और वे भी इसका इस्तेमाल करने लग सकते हैं। इसके अलावा, बच्चे आपके शब्दों का इस्तेमाल दूसरों को आहत करने के लिए भी कर सकते हैं। इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि आप बच्चों के सामने कभी भी अभद्र शब्दों का इस्तेमाल न करें।

सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करें

इसके बजाय, सकारात्मक और सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करें। बच्चों से बात करते समय शांत और धैर्यवान रहें। उन्हें अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए स्वस्थ तरीके सिखाएं। यदि आप अपने बच्चे को गाली देते हुए सुनते हैं, तो उन्हें शांतता से समझाएं कि यह गलत क्यों है। उन्हें बताएं कि ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने से दूसरों को कैसा लग सकता है। यह भी महत्वपूर्ण है कि आप अपने घर के माहौल को सकारात्मक बनाए रखें। परिवार के सदस्यों के बीच सम्मान और प्रेम का माहौल बनाए रखें। बच्चों के साथ खुलकर बात करें और उनकी भावनाओं को समझें।

तारीफ करें

जब बच्चा गाली देना छोड़कर सभ्य भाषा का इस्तेमाल करने लगे, तो उसकी तारीफ करना बहुत महत्वपूर्ण है। उनकी प्रशंसा करने से उन्हें प्रोत्साहन मिलेगा और वे अच्छा व्यवहार जारी रखने के लिए प्रेरित होंगे। उन्हें बताएं कि आपने क्या देखा और आपको उनकी सभ्य भाषा का इस्तेमाल कैसा लगा। जब वे अच्छा व्यवहार करते हैं, तो उन्हें छोटे-छोटे पुरस्कार दे सकते हैं। उन्हें बताएं कि आप उनसे कितना प्यार करते हैं और उनकी कितनी परवाह करते हैं। खुद सभ्य भाषा का इस्तेमाल करें और उनसे भी ऐसा करने के लिए कहें।

 


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भावना चौबे

भावना चौबे

इस रंगीन दुनिया में खबरों का अपना अलग ही रंग होता है। यह रंग इतना चमकदार होता है कि सभी की आंखें खोल देता है। यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि कलम में बहुत ताकत होती है। इसी ताकत को बरकरार रखने के लिए मैं हर रोज पत्रकारिता के नए-नए पहलुओं को समझती और सीखती हूं। मैंने श्री वैष्णव इंस्टिट्यूट ऑफ़ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन इंदौर से बीए स्नातक किया है। अपनी रुचि को आगे बढ़ाते हुए, मैं अब DAVV यूनिवर्सिटी में इसी विषय में स्नातकोत्तर कर रही हूं। पत्रकारिता का यह सफर अभी शुरू हुआ है, लेकिन मैं इसमें आगे बढ़ने के लिए उत्सुक हूं। मुझे कंटेंट राइटिंग, कॉपी राइटिंग और वॉइस ओवर का अच्छा ज्ञान है। मुझे मनोरंजन, जीवनशैली और धर्म जैसे विषयों पर लिखना अच्छा लगता है। मेरा मानना है कि पत्रकारिता समाज का दर्पण है। यह समाज को सच दिखाने और लोगों को जागरूक करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। मैं अपनी लेखनी के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करूंगी।

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