रोटी, कपड़ा, मकान के बाद सबसे जरूरी है-ज्ञान !!

सीखने वाले के लिए शिक्षा, जन्म से लेकर मृत्यु पर्यन्त चलने वाली सतत प्रक्रिया है। शिक्षा हमें कई तरह से प्राप्त होती है। पहली जो हमें घर पर अपने माता-पिता व बड़े बुजुर्गों से मिलती है।

ब्लॉग, नागेश्वर सोनकेशरी। रोटी ,कपड़ा, मकान के बाद जीवन जीने में सबसे जरूरी है ज्ञान। ज्ञान के बिना जीवन दुखद होता है। आप अपने आसपास देखेंगे कि जिन्होंने भी अच्छी पढ़ाई नहीं की है तो, उनका खुद का पूरा जीवन बस स्वयं को किसी तरह ज़िंदा रखने, संघर्ष, ग़रीबी और बीमारी के साथ भोजन की व्यवस्था करने में ही बीत जाएगा। वे इस देश और समाज को कुछ दे नहीं पाईंगे।और अनपढ़ रहकर अपमानित होंगे सो अलग।

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सीखने वाले के लिए शिक्षा, जन्म से लेकर मृत्यु पर्यन्त चलने वाली सतत प्रक्रिया है। शिक्षा हमें कई तरह से प्राप्त होती है। पहली जो हमें घर पर अपने माता-पिता व बड़े बुजुर्गों से मिलती है। दूसरी जो हम स्कूल, कॉलेज और अपने गुरूजनों से लेते हैं। तीसरी शिक्षा हमें दुनियादारी के लोग देते हैं। चौथी शिक्षा हम स्वयं अपने अच्छे-बुरे अनुभव व खुद की समझ से प्राप्त करतें हैं। पहली और दूसरी शिक्षा से चूकने पर जीवन में गरीबी और कठिनाई बनी ही रहेगी व समय बीतने पर पूरे जीवन भर का पछतावा सो अलग ।तीसरी व चौथी शिक्षा से चूकने पर जीवन निरर्थक जा सकता है।

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आप किसी भी प्रोफेशनल डिग्री के व्यक्ति को देखिए,जैसे कि गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ,माइक्रोसॉफ्ट के सत्या नडेला ,ट्विटर के पराग अग्रवाल, गूगल क्लॉउड के सीईओ थॉमस कुरियन,कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर की दिग्गज कंपनी एडोब के साईओ शॉंतनु नारायणन ,पालो अल्टो के निकेश अरोड़ा,फ्लेक्स की सीईओ रेवथी अद्वैत,जयश्री उल्लाल आदि कई बड़े भारतीय नाम हैं, जो शिक्षा के दम पर ही विश्व की जानी-मानी कंपनियों के सीईओ पद तक पहुँचे। अपने साथ-साथ हमारे देश का नाम भी रोशन किया।

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आज इन लोगों का ज्ञान इन्हें यश, समृद्धि और सुख, सब कुछ प्रदान कर रहा है। इसके बनिस्बत किसी अनपढ़ का जीवन देखिए, लाचारी से लदे कंधे उसकी खुद की लाश ढो रहे होते हैं। आप जिस भी क्षेत्र में हैं, यदि छात्र हैं तब तो सबसे अधिक ज्ञान की जरूरत आपको है और कोई दूसरा भी काम करतें हैं तो इन लाईनों को याद रखकर अपना मुकाम जरूर हासिल कीजिएगा।
“कुछ लिखकर सो, कुछ पढ़कर सो।
तू जिस जगह जगा सवेरे,उससे आगे बढ़कर सो ॥”