1200 तक में बिकता है एक आम….डेढ़ से ढाई किलो का एक फल होता है

वजन 3 से 5 किलो तक का होता है और लंबाई ही इसकी 10 से 12 इंच तक होती है। इसलिए इस नूरजहां आम को आमों का सूमो भी कहा जाता है।

अलीराजपुर, यतेन्द्रसिंह सोलंकी। आपने यह तो सुना ही होगा कि आम (mango) को फलों का राजा कहते हैं। लेकिन लेकिन आमों में भी कोई राजा या रानी होता है क्या ये आप जानते है ? जी हां हम बात कर रहे हैं आमों की महारानी ‘नूरजहां’ (noorjahan mango ) की। दशहरी, लंगड़ा, चौसा, तोतापरी, नीलम, वनराज, जरदालू..ऐसी अनेक किस्में हैं जिनका अपना अनोखा स्वाद है। लेकिन इन सबमें भी एक है नूरजहां, यथा नाम तथा गुण की तरह ये आम अपने आप में बेहद खास है और एक फल 1000 से लेकर 1200 रूपये में बिकता है। आपको बता दें कि नूरजहां आम भारत में नहीं बल्कि विदेशों में भी चर्चित है। क्योंकि उसका वजन 3 से 5 किलो तक का होता है और लंबाई ही इसकी 10 से 12 इंच तक होती है। इसलिए इस नूरजहां आम को आमों का सूमो भी कहा जाता है। अहम बात ये कि इसकी पैदावार सिर्फ मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में होती है।

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दरअसल मध्य प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र के कट्ठीवाड़ा इलाके का प्रसिद्ध नूरजहां आम को खाने शौकीन लोगों के लिए बहुत अच्छा समय है। क्योंकि इस बार नूरजहां आम की पैदावार अच्छी खासी हुई है। बगीचा मालिक शिवराज सिंह ने बताया कि इस बार नूरजहां आम की फसल अच्छी मात्रा में लगी हैं। पिछले वर्षो की तुलना में इस वर्ष आम की पैदावार काफी अच्छी हुई है I इस साल डेढ़ सौ से लेकर 200 आम तक पेड़ पर लगे हुए हैं।

आम का नाम नूरजहां क्यों ?
शिवराज सिंह बताते है कि पूरे प्रदेश में सिर्फ हमारे बगीचे में यह आम पाए जाते है। इस आम के पेड़ों को मेरे पिताजी ने आज से 50 साल पहले लगाए थे। उन्होंने पाँच आम के पेड़ लगाए थे। मेरे पापा की पसन्द दीदा अभिनेत्री उस जमाने की नूरजहां थी। उसके नाम से इन आमों के नाम नूरजहां रखा गया था। यह आम इस जिले का बहुत ही फेमस आम है। इन दिनों नूरजहां आम की मध्यप्रदेश सहित पूरे भारत मे चर्चा है। इसको देखने और खरीदनेके लिए मध्यप्रदेश के समीपस्त राज्य गुजरात (Gujarat) महाराष्ट (Maharashtra) और अन्य राज्यो से प्रतिदिन लोग आते है। इसको विदेशों में भी पसन्द किया गया वहाँ पर भी अमेरिका लंदन तक यह आम पहुचाया है। इन दिनों ये पाँच पेड़ सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है । 3 पेड़ बड़े है और 2 पेड़ छोटे है जिन पर अभी आम नही लगे है । शिवराज सिंह बताते है कि मेरा पूरा परिवार इस काम मे लगा है इसकी देख रेख एक छोटे बच्चे को पालन पोषण कर बड़ा करते है उस तरह से ही करनी पड़ती है । मेरे पास बगीचे में 200 से 300 अन्य प्रजाति के आमो के पेड़ मौजूद है। हापुस, लगदा, केसर, बादाम, नूरजहां, तोतापुरी दशेरी, राजपुरी, अनारकली, श्री देवी व देशी जैसे 35 किस्मो के अलग-अलग आम के पेड़ है। इस आम नूरजहां ने कई प्रदेश ओर राष्ट्रीय स्तर पर मुझे पुरुस्कार भी मिले है। वहां पर हर बार यह नूरजहाँ आम प्रथम स्थान आता है कई युवा लोग इसकी ख्याति देखकर कट्ठीवाड़ा आते है इसे देखने के लिए।

बतादें कि अपने भारी भरकम फलों के चलते आमों की मलिका के रूप में मशहूर नूरजहां की फसल अच्छी हुई है। पिछले वर्ष इल्लियों के प्रकोप के चलते नूरजहां की फसल बर्बाद हो गई थी। लेकिन इस बार आम की इस दुर्लभ किस्म के मरीजों के लिए अच्छी खबर है कि मौजूदा मौसम में इस के पेड़ों पर फलों की बहार आ गई है। बता दे की मांग बढ़ने पर इसके केवल एक फल की कीमत 1000 से 1500 रुपये तक भी पहुंच जाती है।