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50 साल बाद घर में जन्मी बेटी, तो गाजे-बाजे के साथ कराया गृह प्रवेश

Written by:Harpreet Kaur
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50 साल बाद घर में जन्मी बेटी, तो गाजे-बाजे के साथ कराया गृह प्रवेश

भिंड, सचिन शर्मा। एक समय ऐसा था जब बेटियों (daughters) को जन्म लेने से पहले ही मार दिया जाता था और अगर कहीं गलती से बेटी पैदा हो भी गई तो उसे या तो कहीं लावारिस की तरह छोड़ दिया जाता था या उसकी सांसे रोक दी जाती थी। पर अब लोगों की सोच बदल रही है, जहां बेटी होने पर लोग दुखी हो जाते थे, तो वहीं अब कई लोग बेटी होने पर गाजे-बाजे के साथ उसका स्वागत करते हैं। ऐसा ही कुछ देखने को मिला मध्यप्रदेश (MP ) के भिंड (Bhind) जिले के मेहगांव में, जहां चौधरी परिवार के घर 50 साल बाद बेटी ने जन्म लिया और परिवार वालों ने लाडली लक्ष्मी का गाजे-बाजे के साथ ग्रह प्रवेश करवाया।

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दरअसल बीते कुछ सालों पहले तक भिंड जिले में लिंगानुपात में भारी अंतर था और यही अंतर लोगों की सोच में भी दिखायी देता था। शिक्षा के क्षेत्र में बेटियों की हायर एजुकेशन में काफी कमी थी। जिले के ज्यादातर लोग प्राइमरी या मिडिल तक पढ़ाने के बाद या तो बेटियों की शादी कर देते थे या फिर से घर पर बैठा लेते थे। कुछ गांवों में तो बेटियों को पैदा होते ही मार दिया जाता था। लेकिन अब वक्त बदल रहा है आज लोग बेटियां पैदा होने के बाद जश्न मनाने लगे हैं।

गौरतलब है कि भिंड जिले के एक दर्जन युवाओं ने जिले के लोगों की बेटियों के प्रति सोच बदलने का तीन साल पहले बीड़ा उठाया और KAMP (किरतपुरा एसोसिएशन मैनेजमेंट ऑफ पावर्टी) नाम से संस्था का निर्माण कर बेटियां पैदा होने वाले घरों के लोगों से संपर्क कर ढोल नगाड़ों के साथ और फूलों से घर को सजा कर बेटियों का ग्रह का प्रवेश कराने का कार्यक्रम शुरू किया था। उसी के तहत आज कैंप संस्था द्वारा मेहगाँव के चौधरी सुशील शर्मा के घर पैदा हुई बिटिया का जिले में 60वीं बेटी के रूप में लक्ष्मी की तरह गृह प्रवेश करा कर ज़िले भर के लोगों की बड़े स्तर पर बेटियों के प्रति सोच परिवर्तन करने का काम किया है।

KAMP संस्था प्रमुख तिलक सिंह भदौरिया ने बताया कि समाज में हो रहे बेटे बेटियों के साथ फर्क ने उन्हें प्रेरणा दी कि वो बेटियों के उत्थान और उनके प्रति लोगों को जागरूक करें। तो उन्होंने यह आयोजन शुरू किया था। धीरे-धीरे उनके साथ लोग जुड़कर इस संस्था के सदस्य बन गए। इस तरह के सामाजिक प्रयास से लोगों में बेटियों के प्रति अवश्य ही जागरूकता पैदा होगी और लोग बेटी को बचाने और शिक्षित करने के लिए आगे आएंगे। समाजिक स्तर पर संदेश देने की अति आवश्यकता है कि बेटियां बेटों से किसी भी मामले में कम नहीं होती है। चाहे वह अंतरिक्ष हो या देश सम्भालना कठिन परिस्थितियों और विभिन्न क्षेत्रों में भी बेटियां अपना परचम लहरा रही है। लोगों को जरूरत है बेटियों के प्रति जागरूक होने की। बतादें कि कैम्प के सदस्यों ने तो इस आयोजन को नाम भी दिया है वे इसे नन्ही परी स्वागत महोत्सव कहते हैं। यदि आपके घर भी आयी है नन्ही परी तो सिर्फ़ एक फ़ोन कॉल की ज़रूरत है कैम्प के सदस्य खुद आपके द्वार बच्ची के जन्म कीखुशियां दोगुनी करने आजाएँगे।

इस जश्न को जिसने देखा उसने तारीफ़ की
इधर, जिले के मेहगांव निवासी सुशील शर्मा और रागिनी शर्मा को 16 सितंबर को कन्या रूपी लक्ष्मी घर की नयी सदस्य बनकर उनके जीवन में आयी और रविवार को ग्वालियर के एक निजी अस्पताल से छुट्टी होकर जब लाडली लक्ष्मी घर पहुंची तो कैंप संस्था द्वारा मेहगांव स्थित उनके निवास पर रास्ते में फूल माला, तुलादान, पैरों की छाप आदि कार्यक्रमों को गाजे-बाजे के साथ संपन्न कराया गया। यह ऐसा जश्न था जिसे देखने के लिए भी लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। और जिसने भी इस जश्न को देखा वो तारीफ करते नहीं रुका।

नन्ही परी के दादा प्रदीप शर्मा के मुताबिक़ उनके परिवार में यह कन्या रूपी रत्न 50 साल बाद आया है। इस भव्य स्वागत के लिए उन्होंने कैंप के सदस्यों से संपर्क कर उनको अपने यहां आमंत्रित किया, जिसको कैंप संस्था के सदस्य सहर्ष स्वीकार करते हुए भिंड से मेहगांव पहुंचे क़रीब 3 घंटे की तैयारी और लाडली लक्ष्मी को गाजे बाजे के साथ गृह प्रवेश कराया।

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