… तो ‘क्षिप्रा एक्सप्रेस’ बन जाती बर्निंग ट्रैन! युवक की तत्परता-सूझबूझ से टल गया बड़ा हादसा

भोपाल। इंदौर से चली क्षिप्रा एक्सप्रेस तेज रफ्तार से अपनी मंज़िल हावड़ा की तरफ दौड़ रही थी। मुसाफिर अपनी-अपनी बातों में मशगूल थे। अलाहाबाद से कुछ मुसाफिरों का और इजाफा कर ट्रैन ने अगले स्टेशन की तरफ दौड़ लगाई ही थी, कि नए मुसाफिरों में शामिल एक युवक ने अचानक गेट की तरफ दौड़ लगा दी। बाकी यात्री हतप्रभ उसे देखते ही रह गए कि अचानक ये किस तरफ चल पड़ा है। गेट की तरफ जाते देखने वालों को किसी अनहोनी का खतरा महसूस हुआ और उन्होंने फौरन जंजीर खींचकर ट्रैन के पहिए थमने के हालात बना दिए। चरमराती जब ट्रेन ने जंगल के बीच पटरी पर दौड़ को विराम दिया तो जिज्ञासा से भरे लोगों ने बाहर की तरफ झांका। स्तिथि पता लगाने के लिए कुछ लोग ट्रेन से नीचे आकर खड़े हो गए। नीचे आने पर पता चला कि वे जिस कोच में सफर कर रहे थे, वह ट्रेन से अलग-थलग हो चुका है और बाकी के डिब्बे कुछ आगे जाकर थमते नजर आ रहे थे।

कोच में सफर कर रहे राजधानी भोपाल की एक नाट्य संस्था माही सोशयो कल्चरल संस्था के कलाकारों प्रखर सक्सेना, निज़ाम पटेल, अदनान खान ने बताया कि अलाहाबाद से सवार होने वाले यात्रियों में सोनू नाम का एक  युवक भी शामिल था। तेज़ी से बाहर की तरफ दौड़ लगाने वाला सोनू ही था। लोगों की हैरानी के बीच सोनू ने सबको आकर बताया कि उसे इस बात का आभास हुआ कि अगले कोच के निचले हिस्से में आग सुलग रही है और तेज़ी से बढ़ भी रही है। सोनू ने इस बात को भांपते हुए कोच के रास्ते ही शंटिंग तक पहुँचने की कोशिश की और इसमें उसको सफलता भी मिल गई। जैसे-तैसे कर सोनू ने दोनों कोच का सम्पर्क विच्छेद कर दिया। ताकि बढ़ती हुई आग अगले डिब्बों तक न पहुंच पाए। चैन पुलिंग के कारण दौड़ते हुए आए रेलवे स्टाफ को आग की सूचना मिली तो उन्होंने फ़ौरन इस पर काबू पाया। करीब एक घण्टा की मशक्कत के बाद हालात सामान्य हुए। सारी स्थिति को नियंत्रण में करने के बाद ट्रेन न अपना सफर निरन्तर किया। राजधानी भोपाल की नाट्य संस्था के सदस्यों ने सोनू के साहस, सूझबूझ और ततपरता से लिए निर्णय पर उसकी प्रशंसा की और उसे नगद ईनाम भी दिया। उन्होंने सोनू का नाम वीरता पुरस्कार में शामिल करने के लिए चिट्ठी-पत्री करने की भी शुरुआत कर दी है।