मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश के किसानों से की ये अपील

भोपाल।

दिल्ली के वायु प्रदूषण ने जनजीवन बुरी तरह से अस्तव्यस्त कर दिया है, लोगों को सांस लेने में कठिनाई हो रही है, चारों तरफ प्रदूषण का जहर फैला हुआ। इसका असर अब मध्यप्रदेश के ग्वालियर में देखने को मिला है। बुधवार को शहरवासी घुटन और आंखो में जलन से परेशान नजर आए। दिल्ली के वायु प्रदूषण को देखते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ को अब प्रदेश की चिंता सताने लगी है।प्रदूषण की रोकथाम और प्रदेश की आबोहवा को सुरक्षित रखने के लिये उन्होंने किसानों से पराली (नरवाई) ना जलाने की अपील की है।उन्होंने कहा है कि बाकि प्रदेशो में हवा में जो जहर फैल रहा है उससे हम अपने प्रदेश को समय रहते बचायें। पराली जलाने की बजाए खाद बनाएं।

कमलनाथ ने किसानो से अपील करते हुए कहा है कि अतिवृष्टि से आपकी फसलो को काफी नुकसान हुआ है और उसकी भरपाई के लिये शासन अपने स्तर पर निरंतर प्रयासरत है।हमने केन्द्र सरकार से इसके लिये मदद भी मांगी हैं।किसानों की नुक़सान की भरपाई के लिये हमारी सरकार वचनबद्ध है।इन सबके बीच आपसे एक महत्वपूर्ण विषय पर अपील करता हूँ कि आप प्रदेश के पर्यावरण की चिंता करते हुए खेत में पराली (नरवाई) न जलाए। इसे जलाने से चौतरफा नुकसान है। पराली जलाने से जमीन के पोषक तत्वों के नुकसान के साथ प्रदूषण भी फैलता है और ग्रीनहाउस गैंसे भी पैदा होती है जो वातावरण को बेहद नुकसान पहुँचाती है। 

उन्होंने कहा कि पराली जलाने से अधजला  कार्बन , कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड तथा राख उत्पन्न होती है जो वातावरण में गैसीय प्रदूषण के साथ धूल कणों की मात्रा में भी वृद्धि करती है।इसके साथ ही पराली जलाने पर मिट्टी के साथ वे कृषि सहयोगी सूक्ष्म जीवाणु तथा जीव भी जल जाते हैं जो भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने में सहायक होते हैं।कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि पराली (नरवाई) जलाये बिना उसी के साथ गेहॅू की बुआई की जाये, सिंचाई के साथ जब पराली सडे़गी तो अपने आप खाद में बदल जायेगी और उसका पोषक तत्व मिट्टी में मिलकर गेहॅू की फसल को अतिरिक्त लाभ देगा। 

आगे उन्होंने कहा कि अब तो ऐसे यंत्र भी उपलब्ध हैं जो ट्रेक्टर में आसानी से लगकर खड़े डंठलों को काटकर इकट्ठा कर सकते हैं और उन्हीं में बुआई भी की जा सकती है। दोनों विकल्प किसानों के लिये फायदेमंद है। पराली जलाने से ज्यादा उसका उपयोग भूसे और पशु चारे में तब्दील करने में है। जलाने की बजाये इसका उपयोग ऊर्जा उत्पादन, कार्डबोर्ड और कागज बनाने में करने का सुझाव भी विशेषज्ञों का है।जलाने के बजाये उसका अन्य उपयोग करें ताकि उन्नत खेती, पशु चारे की उपलब्धता और स्वच्छ प्राणवायु सभी को मिल सके। 

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