नाराज गौर पहुंचे बीजेपी कार्यालय, बंद कमरें में एक घंटे तक चली चर्चा

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भोपाल। लोकसभा चुनाव से पहले अपने बयानों से सियासत में हलचल मचाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर आज सुबह प्रदेश मुख्यालय पहुंचे। जहां उन्होंने प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत से करीब पौन घंटे तक बंद कमरे में चर्चा की। बैठक के बाद गौर के तेवर ठंडे हो गए। उन्होंने इसे सामान्य बैठक बताया और कहा कि वे चाय पीने के  लिए भाजपा कार्यालय आए थे। वहीं गौर ने पार्टी से नाराजगी को लेकर कहा मैं बीजेपी का ही हूं, कोई नाराजगी नहीं है, हालांकि गौर के इस बयान को यू-टर्न बताया जा रहा है। 

इससे पहले बाबूलाल गौर ने यह कहकर सनसनी फैला दी थी उन्हें कांग्रेस की ओर से लोकसभा टिकट का ऑफर मिला है। जिस पर वे विचार कर रहे हैं। तब गौर के तेवर सख्त नजर आ रहे थे। इसके बाद गौर ने अप्रत्यक्ष रूप से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर यह कहकर निशाना साधा कि प्रदेश के भाजपा नेताओं को किसने ठिकाने लगाया। इस बयान से भी गौर चर्चा में आए। गौर के लगातार पार्टी विरेाधी बयान आने के बाद पिछले हफ्ते भाजपा के लोकसभा प्रभारी स्वतंत्र देव सिंह ने उनसे घर जाकर मुलाकात की। इसके बाद बाबूलाल गौर आज सुबह अचानक संगठन महामंत्री सुहास भगत से मिलने पार्टी कार्यालय पहुंच गए। दोनों नेताओं की बीच मुलाकात को हाल ही में हुए राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देखा रहा है। अभी तक भाजपा संगठन के लिए मुसीबत खड़ी कर रहे बाबूलाल गौैर के तेवर आज बदले हुए थे। उन्होंने किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इंकार कर दिया है। हालांकि भाजपा के विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि सुहास भगत ने संगठन के फैसले से गौर को अवगत करा  दिया है। इसके बाद से गौर ने मौन साध लिया है।

चर्चा में कांग्रेसियों से नजदीकियां

बाबूलाल गौर की कांग्रेसियों से नजदीकियां प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। सत्ता परिवर्तन के बाद से ही बाबूलाल गौर अकेले ऐसे भाजपा नेता हैं, जिनके घर कांग्रेसी नेता सबसे ज्यादा आए हैं। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से लेकर उनके  मंत्री बेटे जयवर्धन सिंह, मंत्री जीतू पटवारी समेत कांगे्रस के अन्य नेता भी शामिल हैं। 

कार्रवाई से बच रही भाजपा 

पार्टी सूत्रों के मुताबिक गौर की लगातार बयानबाजी से पार्टी के खिलाफ माहौल बन रहा है। वहीं पार्टी से बर्खास्त नेताओं को एकजुट होने का मौका मिल रहा है। कांग्रेस नेताओं द्वारा इन्हें हवा देने से लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा के कार्यकर्ताओं के बीच भी गलत संदेश जा रहा है। बताया जा रहा है इसी के चलते बाबूलाल गौर को तलब किया गया था|  गौर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर भारतीय जनता पार्टी के हाईकमान पर दबाव बढ़ रहा है| जिसके चलते गौर को समझाइश दी गई है| वहीं इस मुलाकात के बाद गौर के तेवर नरम पड़ गए हैं|