दिग्विजय के समर्थन में आये कमलनाथ, बोले- ईवीएम हटाकर मत पत्र से चुनाव कराए जाएं

दिग्विजय सिंह के आरोपों पर भाजपा ने पलटवार किया है, प्रदेश प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने कहा कि कांग्रेस जहाँ जीतती है वहां ईवीएम पर सवाल क्यों नहीं उठाती? दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश में जीते अपने 66 विधायकों पर ही नहीं जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनी उन सबपर प्रश्न चिन्ह खड़े कर रहे हैं ।

Atul Saxena
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MP News : मध्य प्रदेश में करारी हार मिलने के बाद से कांग्रेस ने फिर से ईवीएम को इसके लिए दोषी ठहराना शुरू कर दिया है, ईवीएम के खिलाफ पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मोर्चा खोल रखा है, आज उन्होंने एक प्रेजेंटेशन के माध्यम से गड़बड़ी दिखाई और दावा किया कि ये संभव है, अब ईवीएम के मुद्दे पर दिग्विजय सिंह के समर्थन में कमलनाथ भी आ गए हैं उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए और भारत के नागरिकों का मतदान 100% सुरक्षित करने के लिए वोटिंग की प्रणाली में बदलाव किया जाए। ईवीएम हटाकर मत पत्र से चुनाव कराए जाएं।

ईवीएम के खिलाफ दिग्विजय का मोर्चा, प्रेजेंटेशन से दिखाया कि कैसे गड़बड़ी संभव हैं  

लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक पार्टियाँ तैयारियों में जुट गई है,  मप्र में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक एक दूसरे पर हमलावर हैं, इस बीच दिग्विजय सिंह ने अपने एक सूत्रीय कार्यक्रम ईवीएम विरोध का झंडा उठा लिया है। दिग्विजय सिंह ने भोपाल स्थित सरकारी आवास पर गुजरात से बुलाए गए एक्सपर्ट अतुल पटेल के माध्यम से एक बार फिर ये बताने का प्रयास किया कि सॉफ्टवेयर की मदद से  ईवीएम मशीन से गड़बड़ी संभव है, एक्सपर्ट अतुल पटेल ने सबके सामने इसे प्रमाणित भी किया। उन्होंने लोगों से ईवीएम में वोट डलवाए जो वीवी पैट में सही दिखे लेकिन वोट की काउंटिंग की गई तो वो दूसरे के खाते में दिखाई दिए, हालाँकि एक्सपर्ट ने सफाई दी कि ये अभी कन्फर्म नहीं है कि जो सॉफ्टवेयर मैंने यूज किया है वही चुनाव आयोग भी करता हो लेकिन प्रोग्रामिंग के जरिये ईवीएम में गड़बड़ी संभव है।

दिग्विजय को मिला कमलनाथ का साथ, मतपत्र से चुनाव कराने की मांग  

दिग्विजय सिंह के इस प्रेजेंटेशन के बाद पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भी उनके समर्थन में आ गए, कमलनाथ ने सोशल मीडिया एकाउंट X पर लिखा- “भारतीय चुनाव प्रक्रिया में ईवीएम मशीन की विश्वसनीयता को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने तकनीकी विशेषज्ञों के साथ आज भोपाल में डमी ईवीएम मशीन में छेड़छाड़ का प्रदर्शन एक पत्रकार वार्ता के जरिए प्रस्तुत किया। वहां मौजूद पत्रकारों ने स्वयं डमी ईवीएम का बटन दबाया और यह पाया कि न सिर्फ वोट संख्या में बल्कि वीवीपेट से प्राप्त होने वाली पर्ची में भी बदलाव किया जा सकता है। इसका सीधा अर्थ है कि जो वोट भारत का नागरिक डाल रहा है उसमें छेड़छाड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए यह आवश्यक हो गया है कि भारतीय लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए और भारत के नागरिकों का मतदान 100% सुरक्षित करने के लिए वोटिंग की प्रणाली में बदलाव किया जाए। ईवीएम हटाकर मत पत्र से चुनाव कराए जाएं और अगर ईवीएम से ही चुनाव कराने हैं तो वोट की पर्ची मतदाता को हाथ में मिलनी चाहिए जिसे वह मत पेटी में डालें और इसी पर्ची को गिना जाए।”

भाजपा प्रवक्ता दिग्विजय पर साधा निशाना, नरेंद्र सलूजा ने कांग्रेस की जीत पर उठाये सवाल

उधर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने ईवीएम पर सवाल उठाने वाले दिग्विजय सिंह पर ही सवाल उठा दिए – सलूजा ने X पर लिखा – “जब से लक्ष्मण सिंह बुरी तरीक़े से चुनाव हारे है और जयवर्धन सिंह चुनाव जीते है , तब से लक्ष्मण सिंह का मूड ख़राब चल रहा है और वो लगातार राहुल गांधी, दिग्विजय सिंह और कांग्रेस को निशाना बना रहे हैं शायद इसी नाराज़गी को दूर करने के लिये दिग्विजय सिंह जी ने आज ईवीएम पर निशाना साधा है, बस वो इस बात का जवाब दे दें कि जब ईवीएम में गड़बड़ी है तो जयवर्धन सिंह का, छिन्दवाड़ा, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना का चुनाव कांग्रेस कैसे जीती? एमपी में कांग्रेस के 66 विधायक चुनाव कैसे जीते? ईवीएम पर आरोप लगाकर दिग्विजय सिंह कर्नाटक, हिमाचल, तेलंगाना, मध्य प्रदेश के 66 कांग्रेस विधायकों की जीत पर ख़ुद प्रश्न चिन्ह लगा रहे हैं, विजयी कांग्रेसी विधायकों का मज़ाक़ उड़ा रहे हैं, दिग्विजय सिंह जी यह भी बताएं कि उनके साथ इस मुद्दे पर कांग्रेस क्यों खड़ी नहीं है?


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पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं ....

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