अक्षय तृतीया पर ‘सामूहिक विवाह’ पर आयोग का इंकार, CM कमलनाथ ने दिया ये सुझाव

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भोपाल।

 प्रदेश में सात मई अक्षय तृतीया को होने वाले सामूहिक विवाह पर रोक लग गई है। अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अरुण कुमार तोमर ने सामाजिक न्याय विभाग के प्रस्ताव को लौटा दिया है। इसके पीछे तर्क दिया गया है कि यदि विवाह आयोजन होते हैं तो इसमें सरकारी अमले को लगाना पड़ेगा। इससे चुनाव का काम प्रभावित हो सकता है। इसलिए यह आयोजन अभी करना संभव नहीं है। इस फैसले के बाद सीएम कमलनाथ  ने पत्र लिख आयोग को निरस्त प्रस्ताव पर पुनर्विचार का अनुरोध किया है।

कमल नाथ ने चुनाव आयोग से अक्षय तृतीया 7 मई को कन्यादान विवाह/निकाह योजना में सामूहिक विवाह आयोजन के राज्य शसन द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को अस्वीकृत करने के निर्णय पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। वही उन्होंने आयोग को सुझाव देते हुए कहा कि चुनाव कार्य में कोई बाधा न आए इसका विकल्प यह हो सकता है कि इस बार सामाजिक संगठनों के माध्यम से भी योजना के क्रियान्वयन की अनुमति मिल जाए तो हजारों गरीब बेटियों की शादी हो सकेगी।इसके लिए चुनाव कार्य में लगे संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की भी आवश्यकता नहीं होगी। राज्य शासन की और से मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को इस आग्रह का पत्र भेजने के निर्देश मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मुख्य सचिव को दिये है।

नाथ ने कहा कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और धार्मिक हिसाब से अखातीज पर विवाह का मुहर्त सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसलिए इस दिन बड़े पैमाने पर विवाह और सामूहिक विवाह होते हैं। कन्यादान विवाह/निकाह योजना के जरिए इस सर्वश्रेष्ठ मुहर्त में गरीब कन्याओं के विवाह भी बड़ी संख्या में होते हैं।  नाथ ने कहा कि कन्यादान विवाह योजना गरीब परिवारों की बेटियों की शादियों के लिए ही बनाई गई है। योजना के अंतर्गत अखातीज पर बड़े पैमाने पर गरीब परिवार के लोग अपनी बेटियों की शादी करने की पहले से ही तैयारी कर लेते हैं। योजना का लाभ अगर इन गरीब परिवारों को नहीं मिला तो वे हताश होंगे।

बता दे कि इस साल अप्रैल, मई और जून में सर्वाधिक 37 विवाह मुहूर्त हैं। इनमें से मार्च के पांच और अप्रैल के छह शुभ मुहूर्त में सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जा सके, क्योंकि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर देशभर में आचार संहिता प्रभावी है। चूंकि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना और निकाह योजना में आर्थिक व्यवस्था सरकार की होती है। इसलिए मार्च में आचार संहिता लागू होते ही सामूहिक विवाह कार्यक्रमों पर रोक लग गई। इससे अब वे लोग परेशान हो रहे हैं, जिन्होंने विवाह की तारीखें पहले से तय कर ली थीं। उन्हें उम्मीद थी कि निरंतर जारी योजना पर रोक नहीं लगेगी, लेकिन आयोग ने इस पर रोक लगा दी, जिसके बाद सीएम ने पत्र लिख पुर्नविचार करने की बात कही है। लोगों का कहना है कि अप्रैल में अभी भी चार मुहूर्त शेष हैं और मई में 14 मुहूर्त हैं।