New Education Policy: शिक्षकों को लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार का बयान

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। नई शिक्षा नीति लागू (New education policy applied) होने के बाद स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) इंदर सिंह परमार (Minister of State for School Education Inder Singh Parmar) का बड़ा बयान सामने आया है। परमार ने कहा कि 5 से 25 सितम्बर तक सभी शिक्षक (Teacher) नई शिक्षा नीति पर अपने-अपने स्तर पर ऑनलाइन या ऑफलाइन विस्तृत चर्चा करेंगे तथा इसका वीडियो बनाकर विभाग के पोर्टल पर अपलोड करेंगे। उन्होंने कहा कि 25 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक नई शिक्षा नीति पर आधारित प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जायेगा। इस तरह नई शिक्षा नीति पर जितना अधिक चिन्तन-मनन, विचार होगा उतना ही बेहतर तरीक से लागू करने में मदद मिलेगी।

मंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति में पूर्व प्राथमिक एवं प्राथमिक शिक्षा को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया है, जिससे बच्चे को सही उम्र से ही शिक्षित किया जा सके। नई शिक्षा नीति के अनुरूप संसाधनों एवं शिक्षकों की पूर्ति की जायेगी। उपर्युक्त कार्य योजना के साथ इस तरह आगे बढ़ेंगे कि प्रदेश अगले तीन साल में विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल होगा। शिक्षकों को प्रत्येक कार्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं विद्यार्थियों के हित को ध्यान में रखकर करना होगा। मंत्री परमार ने विभाग के नवाचारों में बढ़-चढ़ कर कार्य करने वाले शिक्षकों की प्रशंसा की। संसाधनों की कमी के बावजूद प्रत्येक बच्चे को शिक्षा से जोड़ने के लिए आशातीत कार्य करने वाले सभी शिक्षकों की सराहना की। उन्होंने मोहल्ला क्लास, पाठ पढ़ाया पत्थरों ने, लाउड स्पीकर से प्रत्येक बच्चे तक स्कूल पहुँचाने, दिव्यांग होने के बावजूद तिपहिया स्कूटर से बच्चों तक पहुँच कर शिक्षित करने जैसे कई उत्कृष्ट कार्यों का जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि कोरोना संकटकाल जैसी चुनौती को भी प्रदेश के शिक्षकों ने अवसर में बदला है। इस दौरान प्रत्येक बच्चा बिना स्कूल जाये अपने घर में रहकर नियमित रूप से अध्ययन कर रहा है। प्रत्येक बच्चा ऑनलाइन शिक्षा से जुड़ गया है। ऑनलाइन शिक्षा को अभियान के रूप में बच्चे-बच्चे तक पहुँचाने में शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्तमान संकट काल की चुनौती को शिक्षक ही अवसर में बदलने की ताकत रखते हैं, जिसे उन्होंने कर दिखाया। सभी शिक्षक राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप बेहतर कार्य करें और बच्चों में राष्ट्रभाषा एवं मातृभाषा तथा संस्कृति के लिये स्वाभिमान की भावना जाग्रत करें। उन्होंने उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्यों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर विस्तृत चर्चा की और कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के संबंध में एक अभियान चलाकर व्यापक रूप से चर्चा करें। नई शिक्षा नीति के संबंध में समाज में विस्तृत चर्चा एवं प्रचार-प्रसार किया जाए। ताकि नई शिक्षा नीति के संबंध में लोगों को सही जानकारी मिले। साथ ही इसके बेहतर क्रियान्वयन में वे सहयोगी बनें।

नई शिक्षा नीती से ये मिलेगा लाभ

नई शिक्षा नीति में पाठ्यक्रम एवं शिक्षण शास्त्र जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजाईन थिकिंग, होलिस्टिक हेल्थ, ऑर्गेनिक लिविंग, वैश्विक नागरिकता शिक्षा जैसे समसामयिक विषयों की शुरूआत होगी, जिससे स्कूल बैग एवं पाठ्य-पुस्तकों का बोझ कम होगा। विद्यार्थियों को कम उम्र में सही नैतिक निर्णय के महत्व को सिखाया जायेगा। समतामूलक एवं समावेशी शिक्षा की शुरूआत की जायेगी। व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल पर ध्यान दिया जायेगा। व्यावसायिक, प्रौढ़ साक्षरता और जीवन-संवर्धन कार्यक्रम प्रारंभ किये जायेंगे। ऑनलाइन एवं डिजिटल शिक्षा के लिये डिजिटल इन्फ्रा-स्ट्रक्चर का विकास किया जायेगा, वर्चुअल लेब्स बनाई जायेंगी, विश्व-स्तरीय डिजिटल इन्फ्रा-स्ट्रक्चर, शैक्षिक डिजिटल कन्टेंट और क्षमता का निर्माण करने के लिये एक समर्पित इकाई का सृजन किया जायेगा।नई शिक्षा नीति को कई चरण में वर्ष 2040 तक लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रदेश के दो शिक्षक राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2020 से सम्मानित
मध्यप्रदेश के दो शिक्षकों, मोहम्मद शाहिद अंसारी और संजय कुमार जैन को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2020 से सम्मानित किया गया है। भारत के राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद ने ऑनलाइन कार्यक्रम के माध्यम से पुरस्कार प्रदान किये। मोहम्मद शाहिद अंसारी को गणित पढ़ाने में उनकी प्रभावशीलता के लिए सम्मानित किया गया है। वे शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, खिरसाडोह, परासिया छिंदवाड़ा के शिक्षक हैं और पिछले 14 वर्षों से गणित पढ़ा रहे हैं। उन्होंने अन्य शिक्षकों और कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए सार्वजनिक डोमेन में 300 से अधिक वीडियो डाले हैं। उन्होंने छात्रों को शैक्षिक वीडियो दिखाने के लिए अपने स्कूल में एक सौर ऊर्जा संचालित प्रोजेक्टर भी बनाया है।दूसरे पुरस्कार विजेता शिक्षक संजय कुमार जैन शासकीय बालिका प्राथमिक शाला, डूंडा, टीकमगढ़ के शिक्षक हैं। वे एक उच्च प्रेरित और प्रतिबद्ध शिक्षक हैं जिन्होंने मध्य प्रदेश के दूरदराज क्षेत्र में अच्छे बुनियादी ढांचे के साथ एक स्कूल बनाने के लिए कड़ी मेहनत की है। प्रभावी सामुदायिक सहायता की मदद से उन्होंने स्कूल में छात्र दर्ज संख्या को सफलतापूर्वक बढ़ाया है। उन्होंने स्कूल में फर्श, दीवारों और खुले स्थानों का उपयोग करके कई शिक्षण- प्रशिक्षण प्रथाओं का नवाचार किया है। उन्होंने शिक्षण सहायक सामग्री के रूप में आसपास के पत्थर और कंकर का उपयोग किया है।इसके लिए शिक्षकों द्वारा ऑनलाइन पोर्टल www.mhrd.gov.in के माध्यम से स्व-नामांकन किया गया था। उम्मीदवारों को जिला और राज्य स्तरों पर जांच के आधार पर शॉर्टलिस्ट किया गया था तथा पुरस्कारों के लिए अंतिम चयन राष्ट्रीय स्तर पर एक स्वतंत्र जूरी द्वारा किया गया था। जूरी ने वर्ष 2020 के लिए 47 शिक्षकों का चयन किया है।

बता दे कि नई शिक्षा नीति में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा पर जोर दिया गया है। नई शिक्षा नीति का लक्ष्य भारत को एक वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाना है। ड्रापआउट बच्चों की संख्या को कम करना एवं शिक्षा की सार्वभौमिक पहुँच बनाना है। इसके तहत स्कूलों में 5+3+3+4 पाठ्यक्रम को लागू किया जायेगा। विषय विकल्पों की संख्या को बढ़ाया जायेगा, जिससे बच्चे अब आर्टस और साइंस के अलावा शारीरिक शिक्षा, कला, शिल्प और व्यावसायिक विषय भी चुन पायेंगे।

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