खाद की कालाबाजारी का भांडाफोड़, 1 हजार से ज्यादा खाद की बोरियां जब्त, दुकान सील

सिहौनियां थाना पुलिस ने गोदाम में 450 बोरी डीएपी की तथा 500 बोरी यूरिया खाद की रखी पाई। इसके अलावा अन्य बोरियां पाई गई हैं। देर रात की गई इस कार्रवाई में पुलिस ने गोदाम से सभी बोरियां जब्त कर ली हैं।

मुरैना, नितेंद्र शर्मा। मुरैना जिले (Morena district) में खाद की किल्लत किसानों पर भारी पड़ती जा रही है। तो वहीं ऐसी स्थिति में भी लोग खाद की कालाबाजारी करने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला मुरैना के सिहोनिया क्षेत्र से सामने आया है जहां 3 दुकानों पर ब्लैक में खाद बेचा जा रहा था। जिसपर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 1000 बोरियों से ज्यादा खाद जप्त की है।

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जानकारी के मुताबिक सिहोनिया थाना क्षेत्र पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी की सिहोनिया क्षेत्र में कुछ लोगों द्वारा खाद ब्लैक में बेचा जा रहा है। जिसपर पुलिस सिविल ड्रेस में ग्राहक बनकर उस दुकान पर पहुंची जहां कालाबाजारी करते हुए खाद की बोरियों का मोलभाव किया जा रहा था। मामले पर डीएसपी अतुल सिंह और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में तीन दुकानों पर छापा मारा गया जहां से 1000 से ज्यादा खाद की बोरियां जब्त की गई। इस दौरान मामला सामने आया था कि यहां एक दुकान पर एक खाद की बोरी 1670 रुपए में निर्धारित की गई की गई थी लेकिन दुकानदार इसे किसानों को देने के लिए 465 रुपये की अधिक राशि प्रति बोरी किसानों से वसूल रहे थे। इन खाद की बोरियों को बेसमेंट में बने गो डाउन में रखा गया था। वहीं पुलिस की कार्रवाई के बाद इन तीनों दुकानों को सील कर दिया गया है साथ ही प्रशासन द्वारा दुकान मालिक के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

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खेती बाड़ी में किसान के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज है खाद, लेकिन जब गरीब किसान को उचित मूल्य पर खाद उपलब्धि नहीं हो पाए तो ऐसी स्थिति में आखिर किसान क्या करे? जबकि ऐसा समय जहां नई फसल की बुवाई होने के बाद किसानों का काफी समय निकल चुका है, ऐसे में किसानों को फसल को बढ़ाने के लिए खाद की आवश्यकता सबसे ज्यादा पड़ रही है जिसके चलते जिले में खाद की व्यवस्था को देखकर सभी को ज्ञात है कि यहां खाद की किल्लत आज किसानों को उठानी पड़ रही है। अपनी फसलों को बचाने के लिए कहीं किसान खाद पाने के लिए खाद से भरे ट्रक लूट रहे हैं, तो कहीं सरकारी टोकन पाने के लिए लंबी-लंबी कतारें लगा रहे हैं। ऐसे में खाद का ब्लैक होना व नकली खाद का बाजार में आना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।