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बच्चों ने वीडियो के जरिये समझाया वैक्सीन के सेकंड डोज़ का महत्व

Written by:Atul Saxena
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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट।  कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन (Corona’s new variant Omicron) के आने के साथ ही एक बार फिर वैक्सीन के सेकंड डोज़ (second dose of vaccine) लेने की प्रक्रिया को तेज़ करने की ज़रूरत आन पड़ी है। लोगों को सेकंड डोज़ लेने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सरकार कई कदम उठाने की तैयारी में है। वहीं बच्चे भी अब लोगों को जागरूक करने के लिए आगे आने लगे हैं। इसी का उदाहरण हैं वायरल होते वीडियो जिसमें बच्चे सबसे कोरोना गाइडलाइन्स का पालन करने की अपील कर रहे हैं।

दरअसल हाल ही में मुख्यमंत्री निवास पर हुए एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्र शिवराज सिंह चौहान ने बच्चों को सेकंड डोज़ के लिए जागरूकता लाने की खातिर वीडियो सन्देश बनाने के लिए कहा था। इसी के चलते अब बच्चों ने ना केवल टीकाकरण बल्कि कोविड की अन्य गाइडलाइन्स बताते हुए वीडियो जारी करना शुरू कर दिए हैं। ये वीडिओज़ कसबे के बच्चे बना रहे हैं, और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्म और व्हाट्सऐप ग्रुप पर ये वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहे हैं। छोटे बच्चों का ये प्रयास निश्चित रूप से काबिलेतारीफ है।

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ये बच्चे चाइल्ड राइट्स ऑब्जर्वेटरी (सीआरओ) के डिस्ट्रिक्ट स्कूल फोरम के बच्चे हैं। विश्व बाल दिवस के उपलक्ष्य पर आयोजित एक कार्यक्रम में ये बच्चे सीआरओ और यूनिसेफ के अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री से मिले थे। बच्चों के अन्य कार्यों से प्रभावित होकर मुख्यमंत्री चौहान ने उन्हें ये वीडियो संदेश बनाने की सलाह दी थी।

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कक्षा चौथी की छात्रा प्रियांशी ने जो वीडियो बनाया है, उसमें वे खुद भी मास्क पहने नज़र आ रही हैं। प्रियांशी इस वीडियो के ज़रिये लोगों से अपील कर रही हैं कि वे मास्क ज़रूर पहने, दो गज़ की दूरी बनाये रखें, साबुन से हाथ बार-बार धोएं और कोरोना के दोनों टीके ज़रूर लगवाएं। बच्चों के इस प्रयास से गांवों और कस्बों में निश्चित रूप से जागरूकता बढ़ेगी और टीकों को लेकर बड़ों के मन में जो दुविधा है वो अवश्य ही दूर होगी।

टीकाकरण के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक गत 2 दिसंबर तक 79.36 करोड़ लोग टीके लगवा चुके हैं। इनमें से सिर्फ 46.38 करोड़ लोगों ने ही दोनों डोज़ लगवाए हैं और अभी भी 15 करोड़ लोग ऐसे हैं जिन्होंने एक भी डोज़ नहीं लगवाया है। वर्तमान में देश में हर दिन औसतन 80 लाख डोज़ लगाई जा रही है।

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लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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