डबरा- न दो गज दूरी, न मास्क है जरूरी, प्रशासन की लापरवाही के आगे फीका पड़ रहा कोरोना का खौफ

इतना सब होने के बावजूद प्रशासन ने न तो सरकारी राशन की दुकान के बाहर गोले बनाए न ही कोविड गाइडलाइंस का पालन करवाने के लिए लोगों से बात की।

डबरा

डबरा, सलिल श्रीवास्तव।  डबरा में प्रशासन की लापरवाही का अस्वीकार्य चहरा सामने आया है। प्रदेश में कोरोना के मामलों में खास गिरावट आई नहीं है कि लापरवाही (carelessness) का दौर शुरू हो गया है। ग्वालियर (gwalior) जिले की डबरा (dabra) तहसील में सरकार (government) के अनुसार गरीबों को लिए 3 महीने की मुफ्त राशन व्यवस्था चालू की गई है। पर जब मौके पर मीडिया (media) पहुंचा तो वहां हालात कुछ और थे, ना तो दुकान के बाहर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा रहा था ना ही अन्य गाइडलाइंस का। दुकान खुली न होने के कारण लोग भीड़ इक्कठा कर बैठे हुए थे जिनमें से कुछ के लिए न तो दो गज की दूरी जरूरी थी ना ही मास्क (mask) जरूरी था। इतना सब होने के बावजूद प्रशासन ने न तो सरकारी राशन की दुकान के बाहर गोले बनाए न ही कोविड गाइडलाइंस का पालन करवाने के लिए लोगों से बात की।

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दरअसल, डबरा में आज जब सरकार द्वारा 3 महीने के फ्री राशन वितरण की खबर स्थानीय लोगों को लगी तो वह राशन लेने सरकारी दुकान पर पहुंचे। समय पर दुकान न खुलने के कारण उनको वहां दुकान खुलने का इंतजार करना पड़ा जिसके कारण एक एक कर वहां भीड़ इकट्ठा होगयी। मीडिया से बात करते हुए लोगों ने दुकान प्रबंधन पर मनमानी करते हुए राशन वितरण सुचारू रूप से न करने का भी आरोप लगाया। भीड़ में प्रशासन और दुकानदार के लिए गुस्सा साफ तौर पर देखा जा सकता था। मामले की सूचना आला अधिकारियों को दी गई पर उसके बावजूद कोई अधिकारी वहां नहीं पहुंचा। साफ तौर पर अधिकारियों और दुकानदारों के इस रवैए को लापरवाही ही कहा जा सकता है जिससे भविष्य में स्तिथि भयावाय होने के संभावना बनना निश्चित है।

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आपको बता दें कि कोरोना महामारी के चलते मध्यप्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने 3 महीने तक पात्र एवं अपात्र लोगों के लिए मुफ्त में राशन देने की घोषणा की थी। यह कदम सरकार द्वारा कोरोना के बढ़ते हुए केसेस और जनता कर्फ्यू के मद्देनजर उठाया गया था। घोषणा के तहत ये राशन वितरण हो रहा था। लेकिन न तो यहाँ पर वितरण के सुचारू रूप से चलने के लिए कोई व्यवस्था की गई थी, न ही कोविड गाइडलाइन के पालन हेतु कोई प्रयास किये गए थे। जिस तरह की स्थिति इस राशन वितरण से उत्पन्न हुई उससे किसी को फायदा तो नहीं हुआ बल्कि निश्चित ही इस लापरवाही का बहुत बड़ा खामियाजा आगे चलकर हम सबको उसी प्रकार भुगतना पड़ सकता है जिस प्रकार पिछले साल बैंकों के बाहर भीड़ के कारण बढ़े केसेस की वजह से भुगतना पड़ा था।