जिला चिकित्सालय में पदस्थ डॉक्टर ने पूर्व सिविल सर्जन पर लगाए आर्थिक तथा मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप

डिंडोरी, प्रकाश मिश्रा

जिला चिकित्सालय में पदस्थ सीनियर डॉक्टर एके वर्मा ने जिला अस्पताल के निवर्तमान सिविल सर्जन डॉक्टर बीपी कोले पर आर्थिक क्षति पहुंचाने तथा मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप लगाया है।

बता दें कि डॉक्टर वर्मा पूर्व में जिला अस्पताल के सिविल सर्जन का कार्य भी देखते रहे हैं। डॉक्टर वर्मा ने सिविल सर्जन रहते हुए जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए कुछ कड़े कदम भी उठाए थे, जिनमें अपने कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरों की वेतन काटे जाने का मामला भी था, जो काफी चर्चित हुआ था ।  संभवत डॉक्टर वर्मा के इन्हीं कड़े कदमों के कारण उन्हें सिविल सर्जन के प्रभार से हटना पड़ा।

 अवकाश स्वीकृति के बाद भी काटा वेतन

डॉक्टर वर्मा ने बताया कि जिला अस्पताल में कार्य करते हुये उनका स्वास्थ्य खराब हुआ, जिस के इलाज के लिए वे विभागीय अधिकारियों को 1 अगस्त से 4 अगस्त 2019 कुल 4 दिन के अवकाश का आवेदन देकर स्वीकृति प्राप्त कर इलाज के लिए बाहर गये थे। इसी बीच स्वास्थ्य में सुधार ना होने पर उन्होंने अपने उच्चाधिकारियों को सूचित करते हुए पुनः 4 दिवस का अवकाश बढ़ाये जाने का आवेदन किया था। उसके बाद वह समय पर अपने कर्तव्य पर उपस्थित हुए। इतना ही नहीं दिनांक 11 अगस्त 2019 से 13 अगस्त 2019 तक 3 दिन वे अपने मुख्यालय में ड्यूटी पर उपस्थित थे। इस दौरान एमएलसी जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का संपादन भी किया, बावजूद इसके बिना कारण इन 3 दिनों का वेतन काटा गया।

अवकाश की मिली थी स्वीकृति फिर भी काटा गया वेतन

डॉक्टर वर्मा ने बताया कि दिसंबर 2109 में भी उन्होंने अपने डॉक्टर की सलाह पर अपने रूटीन चेकअप के लिए नागपुर जाना पड़ा था, जिसके लिए भी उन्होंने विधिवत 4 दिन का अवकाश स्वीकृत कराया था, जिसकी जानकारी सिविल सर्जन डॉ  बीपी कोले को भी थी। इसके बाद भी इन अवकाश के दिनों का वेतन भी काट दिया गया। इस प्रकार 11 दिवस का वेतन माह अगस्त 2019 में तथा 5 दिन का वेतन दिसंबर माह में काटा गया। जिसके लिए उन्होंने उच्च अधिकारियों सहित जिला कलेक्टर को भी शिकायत की थी। स्मरण पत्र के माध्यम से डॉ वर्मा ने अपने उच्च अधिकारियों को निवेदन किया था कि सिविल सर्जन डॉक्टर बी पी कोले  द्वारा द्वेषपूर्ण कार्यवाही करते हुए अनावश्यक रूप से उनकी सैलरी काटी गई है जिसे भुगतान कराया जाए।

न्याय नहीं मिला तो ली न्यायालय की शरण

डॉ वर्मा की मानें तो उन्होंने अपने सभी उच्च अधिकारियों को बार-बार आवेदन देकर उनकी काटी गई तनख्वाह का भुगतान करने के लिए निवेदन किया किंतु जब उन्हें न्याय नहीं मिला तो मजबूरन उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पडी। न्यायालय ने डॉ एके वर्मा की  याचिका को संज्ञान में लेते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। डॉ वर्मा ने कहा कहा है कि चूंकि मामला न्यायालय में लंबित है और उन्हें उनके साथ हुए अन्याय पर न्यायालय से न्याय मिलने का पूरा भरोसा है।