संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए मैदान में आए पूर्व मुख्यमंत्री, सीएम शिवराज को लिखा पत्र

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की विभिन्न मांगों के निराकरण को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज को पत्र लिखा है।

गुना, संदीप दीक्षित। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह (Rajya Sabha MP Digvijay Singh) ने संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की विभिन्न मांगों को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह (CM Shivraj Singh) को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में कहा है कि कर्मचारियों के प्रति असंवेदनशीलता और दुराग्रह छोड़कर उनकी मांगों का निराकरण किया जाना चाहिए।

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पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पत्र में कहा है कि मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कार्यरत 19 हजार संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी, जिनमें आयुष चिकित्सक, फार्मासिस्ट, लैब टेक्निशयन, स्टॉफ नर्स, ए.एन.एम, डाटा मैनेजर और अन्य समस्त परामेडीकल स्टाफ शामिल है, ये सभी लोग लंबे समय से संविदा पर पदस्थ रहते हुए स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं। इन सभी स्वास्थ्य कर्मचारियों ने मार्च 2020 के बाद प्रदेश कोरोना महामारी से निपटने के लिये अपना अमूल्य योगदान दिया है। अनेक कर्मचारियों के ड्यूटी के दौरान संक्रमित होने के कारण उन्होंने अपना तथा अपने परिवार के अनेक लोगों का जीवन खो दिया है। ये संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी कोरोना योद्धा है जो जोखिम उठाकर न्यूनतम वेतन पर कार्य करके महामारी में लोगों का जीवन बचाने में योगदान दे रहे हैं।

मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं ठप्प

पत्र में कहा गया है कि मध्यप्रदेश में कार्यरत संविदा कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के वेतन का 90 प्रतिशत वेतन देने के संबन्ध आपकी सरकार ने नीति बनाई थी, जिसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में कार्यरत कर्मचारियों के लिये अभी तक लागू नहीं किया गया है। विषमतम परिस्थितियों में न्यूनतम वेतन पर कार्य करने वाले इन स्वास्थ्य कर्मचारियों की उपेक्षा की जा रही है तथा इनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। प्रदेश के हजार संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी सरकार के रवैये से अत्यंत क्षुब्ध और दुखी होकर विगत 24 मई 2021 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है, जिसके कारण पहले से ही कुप्रबंधन से गुजर रही मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं ठप्प हो गई है। इन कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से शहरों के साथ-साथ कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की टेस्टिंग नहीं हो पा रही है और न ही उन्हें समुचित चिकित्सकीय परामर्श मिल पा रहा है। ऐसे हालात में इन कर्मचारियों के प्रति असंवेदनशीलता और दुराग्रह छोड़कर उनकी मांगों का निराकरण किया जाना चाहिए।